Indian Warming: इंडियन वॉर्मिंग ये शब्द आपको नया लग सकता है लेकिन ये नया बिल्कुल भी नहीं है इसे आप ग्लोबल वॉर्मिंग का एक और ज्यादा खतरनाक वर्जन कह सकते हैं. आसान शब्दों में समझें तो भारत में तेजी से बढ़ता तापमान एक गंभीर वैश्विक संकट बन चुका है जो मानव जीवन, कृषि और नेचर के अस्तित्व को चुनौती दे रहा है. इसी संबंध में हाल ही में वैश्विक स्तर पर मौसम और वायु गुणवत्ता पर नजर रखने वाली संस्था एक्यूआई डॉट इन की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. इस लाइव वेदर रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों की सूची में अकेले भारत के 97 शहर शामिल हैं. यह आंकड़ा इस बात को बताता है कि इंडियन वॉर्मिंग अब कोई भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की भयानक हकीकत बन चुका है. 

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क्या है इंडियन वॉर्मिंग? 

ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में तापमान बढ़ने और जलवायु के पूरी तरह बदलने की प्रक्रिया को इंडियन वॉर्मिंग कहा जा रहा है. भारत के कई राज्यों में इस समय में सूरज आग उगल रहा है. एक्यूआई डॉट इन की बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा का बालांगीर और बिहार का सासाराम 48 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ दुनिया के सबसे गर्म स्थान बनकर उभरे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश का वाराणसी 47 डिग्री सेल्सियस पर भट्टी की तरह तप रहा है.

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भयावह स्थिति

स्वास्थ्य संकट- इसके साथ ही अत्यधिक गर्मी के कारण देश भर में हीट स्ट्रोक,डिहाइड्रेशन और ऑर्गन फेलियर का खतरा चरम पर पहुंच गया है. 

जल और बिजली का संकट- वहीं, लगातार बढ़ती भयंकर गर्मी से नदियों, तालाबों और ग्राउन्ड वाटर का लेवल  तेजी से नीचे जा रहा है. साथ ही, एसी और कूलिंग डिवाइसेस के अत्यधिक उपयोग से बिजली ग्रिडों पर भारी प्रेशर पड़ रहा है. 

आर्थिक नुकसान- इसके अलावा दिन के समय तापमान अत्यधिक होने से निर्माण कार्य, कृषि और मजदूरी से जुड़े बाहरी काम पूरी तरह ठप हो रहे हैं, जिसका सीधा असर देश की प्रोडक्टिविटी पर पड़ रहा है. 

दुनिया पर इसका क्या होगा असर?

भारत में बढ़ती इस भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन का असर सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगा. अगर भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो भारतीय उपमहाद्वीप की गर्मी ग्लोबल एयर सर्क्युलेशन को सीधे तौर पर प्रभावित करती है. जब भारत की जमीन इतनी ज्यादा गर्म होगी, तो जाहिर तौर पर इससे वैश्विक मानसून का पूरा चक्र बिगड़ जाएगा, जिसके चलते दुनिया के दूसरे देशों में कहीं भयानक सूखा पड़ेगा तो कहीं ज्यादा बाढ़ आएगी. इसके अलावा, भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि प्रधान देशों में से एक है जो पूरी दुनिया को भारी मात्रा में अनाज, चावल, चीनी और मसालों का निर्यात करता है.  

इंडियन वॉर्मिंग के कारण अगर भारत में फसलें बर्बाद होती हैं और पैदावार घटती है, तो इसका सीधा असर ग्लोबल फूड सप्लाई चेन पर पड़ेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भुखमरी और महंगाई का नया संकट खड़ा हो जाएगा. इतना ही नहीं, अगर भारत के कुछ अत्यधिक गर्म इलाके भविष्य में इंसानों के रहने लायक नहीं बचते हैं, तो बड़े पैमाने पर जलवायु शरणार्थियों का विस्थापन होगा, जिससे दुनिया भर के देशों पर सामाजिक और आर्थिक दबाव असहनीय रूप से बढ़ जाएगा. 

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