America's Currency Monitoring List: अमेरिका के वित्त विभाग ने मेक्सिको, थाईलैंड, इटली, वियतनाम के साथ भारत को प्रमुख व्यापारिक भागीदारों की मुद्रा निगरानी सूची (Currency Monitoring List) से बाहर कर दिया है. भारत को पिछले दो साल से इस सूची में रखा गया था. वित्त विभाग की छमाही रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन देशों को सूची से हटाया गया है, उन्होंने लगातार दो रिपोर्ट में तीन में से एक मानदंड को पूरा किया है. आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा कि आखिर क्या है ये करेंसी मॉनिटरिंग लिस्ट? भारत को इसमें क्यों शामिल किया गया था और इससे बाहर होने का भारत को क्या फायदा या नुकसान होगा? आइए जानते हैं.
क्या है करेंसी मॉनिटरिंग लिस्ट?भारत के लिए इसके फायदे से पहले यह जान लेते हैं कि आखिर ये लिस्ट है क्या? इस लिस्ट में देशों के नाम क्यों शामिल किए जाते हैं और कब हटाए जाते हैं? दरअसल, अमेरिका जिन देशों के साथ बड़े व्यापारिक सौदे करता है, उनकी करेंसी को मॉनिटर भी करता है. इस मॉनिटरिंग में यह देखा जाता है कि कहीं कोई देश जानबूझकर अपनी करेंसी को मैनिपुलेट तो नहीं कर रहा.
क्या होता है करेंसी मैनिपुलेटकरेंसी मैनिपुलेट का अर्थ होता है अपने देश की करेंसी को कमजोर दिखाना. अब आप यह सोच रहे होंगे कि आखिर कोई देश अपनी ही करेंसी को कमजोर क्यों दिखाएगा? दरअसल, कई देश अपनी करेंसी को कमजोर दिखाकर निर्यात (Exports) की लागत को कम दिखाने की कोशिश करते हैं और बताते हैं कि उनका निर्यात कम हो रहा है. कई देश अनैतिक रूप से प्रतिस्पर्धा का लाभ उठाने के लिए ऐसा करते हैं.
सीधे तौर पर कहां जाए तो अपनी करेंसी को कमजोर करने के लिए वह देश अपनी मुद्रा बेचता है और विदेशी मुद्रा (आमतौर पर यूएस डॉलर) खरीद लेता है. इसका परिणाम यह आता है कि हेरफेर करने वाला देश अपनी करेंसी की मांग को घटाकर दूसरे देशों की करेंसी की डिमांड को बढ़ाने में कामयाब हो जाता है.
इस लिस्ट से हटने पर भारत को लाभ?अमेरिका ने भारत को निगरानी सूची से बाहर कर दिया है, और इसका एक शुभ संकेत है. अगर एक्सपर्ट्स की मानें तो अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बिना किसी बाहरी प्रभाव के करेंसी के एक्सचेंज रेट्स को मैनेज कर सकता है. करेंसी मॉनिटरिंग लिस्ट से हटना बाजार के दृष्टिकोण से भी एक बड़ी जीत मानी जा रही है. यह वैश्विक विकास में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शा रहा है.
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