जिस लेबनान पर मिसाइलें दाग रहा इजरायल, वहां कौन सी करेंसी चलती है, भारत का 1 रुपया कितने का?
इजरायल और लेबनान के बीच जारी युद्ध में लेबनान के भीतर मरने वालों का आंकड़ा 2000 के पार पहुंच गया है. दक्षिणी लेबनान में हालिया हमलों ने भारी तबाही मचाई है. आइए जानें कि आखिर लेबनान की करेंसी क्या है.

- युद्ध ने लेबनान की जर्जर अर्थव्यवस्था को और बिगाड़ा.
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने इस समय पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच छिड़ी जंग अब लेबनान के लिए एक भीषण मानवीय और आर्थिक त्रासदी बनती जा रही है. मिसाइलों के धमाकों के बीच लेबनान की आम जनता न केवल अपनी जान बचा रही है, बल्कि देश की चरमराती अर्थव्यवस्था और गिरती मुद्रा के बोझ तले भी दबती जा रही है. आइए जानते हैं कि इस युद्ध के बीच लेबनान की करेंसी का क्या हाल है और भारतीय रुपये के मुकाबले उसकी क्या कीमत है.
लेबनान में मौत का बढ़ता आंकड़ा
दक्षिणी लेबनान में इजरायली वायु सेना के हमलों ने भारी तबाही मचाई है. ताजा जानकारी के मुताबिक, सिडोन के पास एक गांव में हुए हमले में कम से कम 8 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की है कि नबातीह जिले में हुए एक अन्य हमले में 10 और लोग मारे गए, जिनमें 3 आपातकालीन राहत कर्मचारी भी शामिल थे. पिछले एक महीने में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच शुरू हुए इस खूनी संघर्ष में अब तक कुल 2,020 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
क्या है लेबनान की आधिकारिक करेंसी?
युद्ध की विभीषिका के बीच लेबनान की अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह टूट चुकी है. लेबनान की आधिकारिक मुद्रा को लेबनीज पाउंड (Lebanese Pound) कहा जाता है. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में इसे LBP के कोड से पहचाना जाता है. लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक कुप्रबंधन झेल रहे लेबनान के लिए यह युद्ध एक और बड़ा झटका साबित हुआ है. वहां की करेंसी की साख गिरने से आम लोगों के लिए दैनिक जरूरतों का सामान खरीदना भी अब दूभर होता जा रहा है.
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भारतीय रुपये के मुकाबले लेबनीज पाउंड की कीमत
अगर हम लेबनान की मुद्रा की तुलना भारतीय रुपये से करें, तो तस्वीर काफी चौंकाने वाली नजर आती है. वर्तमान एक्सचेंज रेट के हिसाब से लेबनान की करेंसी भारतीय रुपये के सामने बेहद कमजोर हो चुकी है. तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, 1 भारतीय रुपया लगभग 1,000 लेबनीज पाउंड के बराबर पहुंच रहा है. इसका मतलब है कि भारत का एक छोटा सा सिक्का भी लेबनान की करेंसी के मुकाबले बड़ी वैल्यू रखता है. वहां पर हो रही मुद्रा की यह गिरावट वहां की महंगाई और आर्थिक बदहाली को साफ तौर पर बयां करती है.
अर्थव्यवस्था पर युद्ध का गहरा प्रहार
लेबनान पहले से ही दुनिया के सबसे खराब आर्थिक संकटों में से एक का सामना कर रहा था, और अब इजरायल के साथ जारी जंग ने रही-सही कसर पूरी कर दी है. पर्यटन और बैंकिंग सेक्टर जो कभी लेबनान की मजबूती हुआ करते थे, अब पूरी तरह ठप हैं. विदेशी निवेश रुक गया है और महंगाई आसमान छू रही है. जैसे-जैसे जंग लंबी खिंच रही है, लेबनीज पाउंड की कीमत में और भी गिरावट आने की आशंका है, जो देश को पूर्ण आर्थिक पतन की ओर धकेल सकता है.
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