पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी सरगर्मियों के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सबको चौंका दिया है. फाल्टा विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के मतदान से ठीक दो दिन पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार ने मैदान छोड़ दिया है. चुनाव प्रचार के दौरान फिल्मी अंदाज में अपनी ताकत दिखाने वाले नेता के इस फैसले से खुद पार्टी नेतृत्व भी हैरान है. सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आखिर ऐन वक्त पर ऐसा क्या हुआ कि उम्मीदवार को पीछे हटना पड़ा. आइए जानें क्या इसके खिलाफ टीएमसी केस कर सकती है.

Continues below advertisement

चुनावी मैदान से पीछे हटे जहांगीर

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को मतदान से ठीक पहले एक बहुत बड़ा झटका लगा है. सूबे की फाल्टा विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक दो दिन पहले पार्टी के घोषित उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से पूरी तरह इनकार कर दिया है. उन्होंने आधिकारिक तौर पर चुनावी मैदान से अपना नाम वापस ले लिया है. आपको बता दें कि इस विधानसभा सीट पर पहले हुए चुनाव में धांधली के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद चुनाव आयोग ने यहां दोबारा उपचुनाव कराने का फैसला लिया था और इसके लिए 21 मई को वोटिंग तय की गई है.

Continues below advertisement

झुक गए 'पुष्पा' के तेवर

टीएमसी के पूर्व उम्मीदवार जहांगीर खान अपने चुनावी अभियान के दौरान सोशल मीडिया पर खूब छाए हुए थे. वह मशहूर फिल्म 'पुष्पा' का लोकप्रिय डायलॉग 'पुष्पा झुकेगा नहीं' बोलकर सुर्खियों में आए थे. चुनाव प्रचार के दौरान उनके इस आक्रामक और फिल्मी अंदाज वाले वीडियो काफी वायरल हुए थे. उनके इस कड़े तेवर को देखकर किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि वोटिंग से ठीक दो दिन पहले वह अचानक घुटने टेक देंगे. उनके इस अप्रत्याशित फैसले ने जहां टीएमसी को संकट में डाल दिया है, वहीं सोशल मीडिया पर लोग उन्हें जमकर ट्रोल कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें: History of Mumbai: इस शख्स ने बसाई थी मुंबई, जिसके लिए छिन गई थी उसकी नौकरी? जानें पूरा मामला

क्या केस दर्ज कर सकती है टीएमसी?

जहांगीर खान के इस तरह अचानक बीच मझधार में पार्टी को छोड़ने के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि ममता बनर्जी उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं. लेकिन असलियत यह है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या टीएमसी सीधे तौर पर जहांगीर खान के खिलाफ कोई कानूनी केस दर्ज नहीं कर सकती हैं. चुनावी नियमों के तहत किसी भी उम्मीदवार को अपना नाम वापस लेने का अधिकार होता है. हालांकि, टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व ने उनके इस गैर-जिम्मेदाराना कदम और ऐन वक्त पर चुनावी मैदान को खाली छोड़ने के फैसले की कड़ी आलोचना की है. 

फैसले के पीछे का दबाव

फाल्टा विधानसभा सीट से पीछे हटने के बाद जहांगीर खान ने पार्टी के रुख के बिल्कुल उलट जाकर काम किया है. उन्होंने मीडिया और पार्टी के सामने अपने इस चौंकाने वाले फैसले के पीछे कुछ निजी कारणों का हवाला दिया है. इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक और मानसिक दबाव की बात भी स्वीकार की है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग की सख्त निगरानी और पार्टी के भीतर चल रही खींचतान के कारण जहांगीर खान खुद को सुरक्षित नहीं पा रहे थे, जिसकी वजह से उन्होंने मतदान प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले सरेंडर करना बेहतर समझा.

यह भी पढ़ें: Namaz In Islam: इस्लाम में बेहद खास है नमाज, जानें मस्जिद के अलावा किन जगहों पर सजदा कर सकते हैं मुस्लिम?