Water Planets: दशकों तक वैज्ञानिकों का यह मानना था कि पृथ्वी अपने विशाल महासागर और जीवन को सहारा देने वाले वातावरण की वजह से अनोखी है. हालांकि आधुनिक अंतरिक्ष रिसर्च से पता चला है कि ब्रह्मांड में कई दूर के ग्रहों पर भी भारी मात्रा में पानी हो सकता है. सबसे ज्यादा चर्चा में दो ही उदाहरण हैं, TOI-1452 b और K2-18b. इन दोनों ग्रहों के बारे में यह माना जाता है कि यह लगभग पूरी तरह से गहरे वैश्विक महासागरों से ढके हुए हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर वहां पर पानी मौजूद है तो फिर इंसान भविष्य में इन ग्रहों पर क्यों नहीं बस सकते? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
कोई ठोस जमीन नहीं
इन जल ग्रहों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां पर सूखी जमीन बिल्कुल भी नहीं है. पृथ्वी पर महासागर क्षेत्र के ज्यादातर हिस्से को ढके हुए हैं लेकिन इसके बावजूद भी हमारे पास महाद्वीप, पहाड़ और द्वीप हैं जहां इंसान शहर और बुनियादी ढांचा बना सकते हैं. TOI-1452 b और K2-18b जैसे ग्रहों पर वैज्ञानिकों का यह मानना है कि महासागर सैकड़ों किलोमीटर की गहराई तक फैली हो सकते हैं और वहां जमीन का कोई भी हिस्सा दिखाई नहीं देता. ठोस जमीन के बिना घर, अनुसंधान केंद्र, खेत या फिर परिवहन प्रणाली बनाना असंभव होगा.
पृथ्वी के पानी से अलग
हालांकि इन ग्रहों पर पानी मौजूद है लेकिन वहां की परिस्थितियां पृथ्वी से काफी अलग हैं. काफी ज्यादा गहराई पर भारी दबाव की वजह से साधारण पानी अजीब क्रिस्टलीय रूप में बदल जाता है. इन्हें Ice VII या Ice X के नाम से जाना जाता है. रेफ्रिजरेटर या फिर ग्लेशियरों में मिलने वाली सामान्य बर्फ के उलट यह अनोखे रूप काफी घनी चट्टान की तरह व्यवहार करते हैं.
जानलेवा वातावरण
एक और बड़ी समस्या इन ग्रहों को घेरे हुए वातावरण है. माना जाता है कि K2-18b जैसे ग्रहों का वातावरण काफी ज्यादा घना है. इसमें मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैस मौजूद हैं. इंसान इन गैसों में सांस नहीं ले सकते और किसी खास सुरक्षा कवच के बिना वहां जीवित रहना संभव नहीं होगा. इन ग्रहों पर तापमान और वायुमंडलीय दबाव भी काफी ज्यादा खतरनाक है. कुछ इलाकों में पानी शायद सामान्य तरल रूप में मौजूद ही ना हो बल्कि एक सुपर क्रिटिकल फ्लूइड के रूप में हो. यह एक अजीब अवस्था होती है जो कुछ हद तक गैस की तरह और कुछ हद तक तरल की तरह व्यवहार करती है.
दूरी की वजह से इंसानी सफर नामुमकिन
भले ही भविष्य में कोई ऐसी टेक्नोलॉजी आ जाए जिससे इंसान ऐसी स्थितियों में भी जिंदा रह सकें लेकिन इसके बावजूद भी एक चुनौती बाकी रहेगी. वह चुनौती है दूरी. TOI-1452 b ग्रह पृथ्वी से लगभग 100 प्रकाश वर्ष दूर है. एक प्रकाश वर्ष का मतलब लगभग 9.46 ट्रिलियन किलोमीटर होता है. आज की स्पेसक्राफ्ट टेक्नोलॉजी से इतनी दूरी तय करने में सालों नहीं बल्कि शायद लाखों साल लग जाएंगे.
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