Mahabharata Draupadi Pani Puri Story: भारत में शायद ही कोई ऐसा स्ट्रीट फूड हो, जो पानी पूरी या गोलगप्पे के आसपास टिकता हो. अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर गोलगप्पे की शुरुआत कहां से हुई? इसके इतिहास को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं. इनमें सबसे लोकप्रिय कहानी महाभारत की द्रौपदी से जुड़ी मानी जाती है, जबकि इतिहासकार इसकी शुरुआत प्राचीन मगध से जोड़ते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या पहला गोलगप्पा महाभारत में बना था और इसका द्रौपदी कनेक्शन क्या है. 

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द्रौपदी और गोलगप्पे का कनेक्शन क्या है?

अमर चित्र कथा में बताई गई एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, जब पांडव वनवास में थे, तब द्रौपदी का विवाह नया-नया हुआ था. उस समय उनकी माता कुंती ने उनकी समझदारी और गृह प्रबंधन की परीक्षा लेने का फैसला किया. कहा जाता है कि कुंती ने द्रौपदी को सिर्फ थोड़ा-सा बचा हुआ आलू का मिश्रण और इतनी ही मात्रा में गेहूं का आटा दिया, जिससे मुश्किल से एक छोटी रोटी बन सकती थी. साथ ही उन्होंने कहा कि इन्हीं चीजों से पांचों पांडवों का पेट भरना है. 

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क्या पहला गोलगप्पा महाभारत में बना था?

द्रौपदी ने उपलब्ध सामग्री का अलग तरीके से इस्तेमाल किया. उन्होंने आटे को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा और उन्हें तलकर छोटी-छोटी फूली हुई पूड़ियां तैयार कीं. इसके बाद उन पूड़ियों में बचा हुआ आलू का मिश्रण भर दिया. इस तरह बहुत कम सामग्री से ऐसी डिश तैयार हुई, जिसे पांचों पांडव खा सकें. कहा जाता है कि द्रौपदी की इस सूझबूझ से कुंती खुश हुईं और उन्होंने इस डिश को हमेशा लोकप्रिय बने रहने का आशीर्वाद दिया. इसी वजह से कई लोग इस कहानी को गोलगप्पे की शुरुआत से जोड़कर देखते हैं. 

इतिहासकार क्या मानते हैं?

हालांकि, इतिहासकार इस कहानी को ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मानते. उनके अनुसार गोलगप्पे की शुरुआत प्राचीन मगध क्षेत्र में हुई थी, जो आज के बिहार का हिस्सा माना जाता है. माना जाता है कि उस समय गोलगप्पे का शुरुआती रूप फुलकी कहलाता था. आज भी भारत के कुछ इलाकों में पानी पूरी को फुलकी नाम से जाना जाता है. 

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इतिहासकारों के अनुसार, शुरुआती फुलकी आज के गोलगप्पों की तुलना में आकार में छोटी और ज्यादा कुरकुरी होती थी. हालांकि, उनमें क्या भरकर परोसा जाता था, इसका कोई साफ रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. समय के साथ यह पूरे भारत में फैल गया और अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से पहचाना जाने लगा. उत्तर भारत में इसे गोलगप्पा, कोलकाता में पुचका, ओडिशा में गुपचुप, उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बताशे और कुछ जगहों पर फुलकी कहा जाता है. 

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