Vladimir Putin India Visit: रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन आज शाम अपने दो दिवसीय दौरे के लिए भारत आ रहे हैं. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है. इसी बीच एक सवाल यह उठा रहा है कि आखिर पुतिन का एयरक्राफ्ट किस रास्ते से आएगा. हालांकि दुनिया के किसी भी लीडर के लिए हवाई रास्ते पूरी तरह से कॉन्फिडेंशियल रखे जाते हैं. लेकिन जियोपॉलिटिकल पैटर्न, नो फ्लाई नियम और वीआईपी एविएशन प्रोटोकॉल को एनालाइज करके अंदाजा लगाया जा सकता है कि मॉस्को से भारत के लिए उड़ान भरते समय उनका एयरक्राफ्ट किन संभावित कॉरिडोर का इस्तेमाल कर सकता है.

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संभावित मुख्य रास्ता 

मॉस्को और नई दिल्ली के बीच सबसे ज्यादा संभावना वाला, सबसे छोटा और सबसे सुरक्षित रास्ता सेंट्रल एशियाई इलाके से होकर उड़ाना है. एयरक्राफ्ट रूस के बड़े एयरस्पेस के अंदर से अपनी यात्रा को शुरू करेगा और फिर दक्षिण की तरफ बढ़ेगा. उम्मीद है कि यह रूस के सबसे करीबी देश कजाकिस्तान से होकर गुजरेगा और उसके बाद उस दिन के लिए मंजूर एयरलेन के आधार पर उज्बेकिस्तान या ताजिकिस्तान से होकर गुजरेगा. वहां से फ्लाइट आमतौर पर अफगानिस्तान के ऊपरी ऊंचाई वाले कॉरिडोर में जाती है. इस इलाके को पार करने के बाद एयरक्राफ्ट आसानी से भारतीय एयरस्पेस में घुस जाएगा और नई दिल्ली की तरफ उतरेगा. इस रूट को आम तौर पर सबसे ज्यादा प्रैक्टिकल माना जाता है क्योंकि यह यूरोपीय पाबंदियों से बचता है, फ्लाइट के घंटे कम करता है और ऐसे एयरस्पेस पर निर्भर करता है जो रूस लिए खुले और सहयोगात्मक होते हैं.

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एक दूसरा रास्ता 

अगर रूस सिक्योरिटी अलर्ट या फिर मौसम की वजह से अफगान एयरस्पेस से बचना चाहता है तो एक और दूसरा रास्ता है. मॉस्को से एयरक्राफ्ट कजाकिस्तान से तुर्किस्तान में जाएगा और ईरान में आगे बढ़ेगा. ईरान से यह रास्ता ओमान या फिर अरब सागर के ऊपर इंटरनेशनल एयर स्पेस की तरफ जाता है. इसके बाद यह गुजरात राजस्थान की तरफ भारत पहुंचता है. इस कॉरिडोर का इस्तेमाल अक्सर सरकारी एयरक्राफ्ट करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ईरान के रूस और भारत दोनों के साथ स्टेबल डिप्लोमेटिक संबंध है.

लंबा लेकिन सुरक्षित रास्ता 

इस हाई प्रोफाइल विजिट के लिए जहां फ्लाइट के समय से ज्यादा जियोपॉलिटिकल सेफ्टी को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है कभी-कभी तीसरा रास्ता चुना जाता है. ऐसे हालातों में पुतिन का एयरक्राफ्ट कजाकिस्तान से अजरबैजान होकर गुजरेगा और फिर ओमान या फिर यूएई बाउंड्री जोन की तरफ जाने से पहले ईरान के ऊपर एक लंबा रास्ता तय करेगा. इसके बाद वह आखिर में अरब सागर के रास्ते से भारत में एंट्री करेगी. यह कॉरिडोर फ्लाइट को नाटो के कंट्रोल वाले सभी इलाकों को बाईपास करने और स्थिर संघर्ष वाले जोन से बचने की इजाजत देता है.

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