Vaibhav Sooryavanshi In IPL: क्या 18 साल से कम उम्र के खिलाड़ियों का IPL खेलना अपराध है? जानिए क्या कहता है बालश्रम कानून
Vaibhav Sooryavanshi In IPL: आईपीएल में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के खेलने पर बालश्रम के आरोप लगाए गए हैं. आइए जानें क्या किसी नाबालिग खिलाड़ी का पेशेवर क्रिकेट खेलना अपराध की होता है कि नहीं.

- बीसीसीआई के नए नियम, रणजी ट्रॉफी अनुभव अनिवार्य करते हैं.
Vaibhav Sooryavanshi In IPL: आईपीएल 2026 के सीजन में 15 साल के युवा वैभव सूर्यवंशी के मैदान पर उतरते ही भारतीय क्रिकेट में एक नई कानूनी बहस छिड़ गई है. जहां दुनिया उनके टैलेंट की तारीफ कर रही है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता इसे बालश्रम बताकर राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं. क्या वाकई करोड़ों की इस लीग में किसी किशोर का खेलना अपराध है या यह सिर्फ सुर्खियों में बने रहने का एक जरिया? आइए, भारतीय बालश्रम कानून और बीसीसीआई के सख्त नियमों के चश्मे से इस पूरे विवाद की तह तक जाते हैं.
वैभव सूर्यवंशी और कानूनी धमकी का साया
राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेल रहे 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की आईपीएल में मौजूदगी अब केवल उनके खेल तक सीमित नहीं रह गई है. एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आईपीएल में उनकी भागीदारी को बाल श्रम करार देते हुए एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी है. उनका तर्क है कि एक किशोर को इस तरह के भारी दबाव वाले व्यावसायिक खेल में झोंकना कानून का उल्लंघन है. वैभव पहले भी अपनी उम्र और किट में एआई चिप जैसे अजीबोगरीब दावों को लेकर चर्चा में रहे हैं, लेकिन यह कानूनी पेंच उनके करियर के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.
क्या आईपीएल खेलना बालश्रम की श्रेणी में आता है?
भारतीय कानून के मुताबिक, आईपीएल जैसे पेशेवर खेल आयोजनों में 18 साल से कम उम्र के खिलाड़ियों की भागीदारी को बालश्रम नहीं माना जाता है. बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम के तहत बच्चों को जोखिम भरे उद्योगों में काम करने से रोका गया है, लेकिन कला, मनोरंजन और खेल जैसी श्रेणियों में कड़ी शर्तों के साथ छूट दी गई है. चूंकि आईपीएल एक संरचित, अनुबंधित और बीसीसीआई द्वारा विनियमित आयोजन है, इसलिए इसे शोषण के बजाय कौशल विकास और पेशेवर अवसर के तौर पर देखा जाता है.
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बीसीसीआई के अनुभव से जुड़े नए नियम
सितंबर 2025 से बीसीसीआई ने आईपीएल में कम उम्र के खिलाड़ियों की एंट्री को लेकर नियमों को और भी सख्त कर दिया है. अब कोई भी अंडर-16 या अंडर-19 खिलाड़ी सीधे आईपीएल के मंच पर नहीं पहुंच सकता है. नए नियमों के मुताबिक, किसी भी किशोर खिलाड़ी को आईपीएल नीलामी का हिस्सा बनने के लिए अपने राज्य की टीम से कम से कम एक फर्स्ट-क्लास यानी रणजी ट्रॉफी मैच खेलना अनिवार्य है. वैभव सूर्यवंशी ने 14 साल की उम्र में ही घरेलू क्रिकेट में अपना हुनर साबित किया था, जिसके बाद ही उन्हें नीलामी का रास्ता मिला है.
सीधी एंट्री पर रोक और प्रतिभा की परख
बीसीसीआई का स्पष्ट मानना है कि आईपीएल का स्तर बहुत ऊंचा है, इसलिए बिना घरेलू क्रिकेट के अनुभव के किसी भी युवा को इसमें उतारना जोखिम भरा हो सकता है. अब 'स्ट्रीट टू आईपीएल' जैसे कॉन्सेप्ट पूरी तरह खत्म हो चुके हैं. यदि किसी खिलाड़ी की उम्र 15 से 18 साल के बीच है, तो उसे पहले रेड बॉल क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) में अपनी योग्यता साबित करनी होगी. यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि खिलाड़ी न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी बड़े स्तर के दबाव को झेलने के लिए तैयार है.
उम्र की कोई न्यूनतम सीमा नहीं, अनुभव ही पैमाना
कानूनी और तकनीकी तौर पर आईपीएल खेलने के लिए कोई सख्त न्यूनतम आयु सीमा तय नहीं की गई है. हालांकि, 15 से 18 वर्ष के खिलाड़ी तभी खेल सकते हैं जब वे बीसीसीआई के अनुभव संबंधी मानदंडों को पूरा करते हों. वैभव सूर्यवंशी का उदाहरण यह साबित करता है कि यदि खिलाड़ी ने घरेलू स्तर पर असाधारण प्रदर्शन किया है, तो उम्र उसके आड़े नहीं आएगी. कानून इसे अपराध नहीं मानता क्योंकि खिलाड़ी एक पेशेवर अनुबंध के तहत होता है जिसमें उसकी शिक्षा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है.
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Source: IOCL


























