US Tariff On Medicines: एक बड़े कदम के तहत डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए कुछ खास इम्पोर्टेड दवाइयों पर 100% टैरिफ लगाने की घोषणा की है. आइए जानते हैं कि ट्रंप के इस फैसले के बाद भारत पर क्या असर पड़ेगा और साथ ही अमेरिका भारत से कौन सी दवाइयां इंपोर्ट करता है.

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अमेरिका भारत से कौन सी दवाइयां इंपोर्ट करता है?

अमेरिका की हेल्थ केयर व्यवस्था में भारत की भूमिका काफी ज्यादा अहम है. इसका सबसे बड़ा हिस्सा जेनेरिक दवाइयों का है. ये ब्रांडेड दवाइयों के सस्ते विकल्प होते हैं. असल में अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली लगभग 40% जेनेरिक दवाइयां भारतीय कंपनियां ही बनाती हैं.  ये जेनेरिक दवाइयां भारत से अमेरिका को होने वाले कुल दवा एक्सपोर्ट का लगभग 90% हिस्सा हैं.

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इसी के साथ एक और जरूरी कैटिगरी है एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स. यह दवाइयां बनाने में इस्तेमाल होने वाला जरूरी कच्चा माल होता है. इनके बिना दवाइयों का उत्पादन पूरी तरह से ठप हो जाएगा. इसी के साथ भारत बायोसिमिलर्स के क्षेत्र में भी एक उभरता हुआ खिलाड़ी है. ये बायोलॉजिकल दवाइयों के किफायती विकल्प होते हैं. यह सेगमेंट काफी तेजी से बढ़ रहा है और इसमें भारत की हिस्सेदारी काफी ज्यादा है. 

क्या सभी दवाइयों पर इसका असर पड़ेगा?

दिलचस्प बात यह है कि सभी दवाइयां इस नए टैरिफ के दायरे में नहीं आती हैं. जेनेरिक दवाईयों को फिलहाल इस टैरिफ से छूट दी गई है. इससे यह पक्का होता है कि अमेरिका में सस्ती दवाइयां आसानी से बिकती रहेंगी. हालांकि यह छूट सिर्फ कुछ समय के लिए है और 1 साल बाद इसकी समीक्षा की जा सकती है. इसका असली असर उन ब्रांडेड या पेटेंट दवाइयों पर पड़ेगा जो आमतौर पर ज्यादा महंगी और तकनीकी रूप से ज्यादा एडवांस्ड होती हैं.

कीमतें कितनी बढ़ सकती हैं? 

100% तारीफ का सीधा सा मतलब है कि अगर कंपनियां इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं तो प्रभावित दवाइयों की कीमतें दोगुनी हो सकती हैं. उदाहरण के लिए $100 की कीमत वाली कोई ब्रांडेड दवा कंपनियों द्वारा कीमतों में किए गए बदलाव के आधार पर लगभग $200 तक महंगी हो सकती है. 

भारतीय दवा कंपनियों पर असर 

जिन भारतीय कंपनियों के पास ब्रांडेड या फिर नई दवाओं का मजबूत पोर्टफोलियो है उन्हें दबाव का सामना करना पड़ सकता है. उन कंपनियों को या तो लागत खुद उठानी पड़ सकती है या फिर  यूनाइटेड स्टेट्स बाजार में कीमत बढ़ानी पड़ सकती हैं. 

तारीख से बचने के तरीके 

जो कंपनियां यूनाइटेड स्टेट्स में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाती हैं या फिर कुछ खास प्राइसिंग फ्रेमवर्क पर सहमत होती हैं उन्हें जीरो टैरिफ का फायदा मिल सकता है. इसी के साथ जो कंपनियां भविष्य में यूनाइटेड स्टेट्स में उत्पादन करने का वादा करती हैं उन्हें लगभग 20% कम टैरिफ देना पड़ सकता है.

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