Pakistan Blackout: मिडिल ईस्ट में अभी भी तनाव जारी है. इस तनाव का असर अब युद्ध के मैदान से बाहर भी देखने को मिल रहा है. इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पाकिस्तान के पावर ग्रिड पर पड़ा है. ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान पाकिस्तान में बिजली कटौती में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसके चलते अब सरकार को पूरे देश में तय समय पर लोड शेडिंग का सहारा लेना पड़ रहा है. इस स्थिति ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान में बढ़ता अंधेरा सीधे तौर पर ईरान के संकट से जुड़ा है? आइए जानते हैं.

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ईरान संकट और ईंधन की कीमतें 

मौजूदा बिजली संकट के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान संघर्ष की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई रुकावट है. पाकिस्तान बिजली बनाने के लिए काफी हद तक आयातित तेल और गैस पर निर्भर है. ईंधन की कीमत आसमान छू रही हैं और पावर प्लांट चलाने की लागत काफी ज्यादा हो गई है. इस वजह से सरकार को भारी नुकसान उठाने के बजाय बिजली की आपूर्ति में कटौती करने पर मजबूर होना पड़ रहा है. 

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लागत कंट्रोल करने के लिए उठाया गया कदम 

आर्थिक बोझ को संभालने के लिए पाकिस्तान ने हर शाम लगभग दो से ढाई घंटे की बिजली कटौती को लागू किया है. यह उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत पीक आवर्स के दौरान बिजली उत्पादन कम किया जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय ईंधन की खपत और लागत सबसे ज्यादा होती है.

पीक आवर्स की मांग से ग्रिड पर दबाव 

पाकिस्तान में बिजली की मांग शाम 5:00 बजे से रात के 1:00 के बीच तेजी से बढ़ जाती है. इस दौरान घर और कारोबार सबसे ज्यादा बिजली की खपत करते हैं. महंगे ईंधन पर आधारित बिजली उत्पादन पर होने वाले भारी खर्चे से बचने के लिए अधिकारी जान-बूझकर इन घंटे के दौरान बिजली की आपूर्ति को सीमित कर रहे हैं.

संकट को और भी बदतर बनाने वाला एक और बड़ा कारण है. दरअसल जलविद्युत उत्पादन में काफी कमी है. पानी के स्रोत से कम बिजली बनने की वजह से पाकिस्तान को थर्मल पावर पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है. यह महंगे आयातित ईंधन पर निर्भर करती है जिस वजह से सिस्टम पर और भी ज्यादा दबाव पड़ रहा है. 

इसी के साथ अंदरूनी मुद्दे भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. पाकिस्तान रेलवे और कोयल पर आधारित पावर प्लांट के बीच चल रहे विवाद में ईंधन के परिवहन में रुकावट डाल दी है. इसमें लगभग 1500 से 1800 मेगावाट बिजली का उत्पादन प्रभावित हुआ है. 

ईरान संकट का असर 

ईरान संकट का पाकिस्तान पर सीधा असर पड़ा है. होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम रास्ते में आई रुकावट ने वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं. इसी के साथ कतर से 9 मई तक एलएनजी की सप्लाई रुकने की खबरों ने ऊर्जा की उपलब्धता को और भी ज्यादा सीमित कर दिया है. इस वजह से संकट और भी गहरा गया है.

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