Kurds In Iran: मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन और ईरान पर चल रहे हमलों के बीच जियोपॉलिटिकल सिचुएशन में एक और नया पहलू सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक कुर्दिश लड़ाके लड़ाई में एक्टिव हो सकते हैं. ऐसे दावे हैं कि कुछ विदेशी ताकतें कुर्दिश ग्रुप को सपोर्ट करने पर विचार कर रही हैं. इससे ईरान के अंदर चिंता बढ़ गई है. इसी बीच आइए जानते हैं कौन हैं कुर्द और आखिर ईरान को इनसे खतरा क्यों है?

कौन हैं कुर्द?

कुर्द एक एथेनिक ग्रुप है जिसकी अपनी अलग भाषा, कल्चर और ट्रेडीशन है. उनकी भाषा इंडो यूरोपियन भाषा परिवार की ईरानी ब्रांच से जुड़ी है और पूरे इलाके में कई बोलियों में बोली जाती है. ऐसा कहा जाता है कि दुनिया भर में कुर्द आबादी 25 मिलियन से 45 मिलियन के बीच है. इनमें से ज्यादातर तुर्की, ईरान, इराक और सीरिया के पहाड़ी इलाकों में रहते हैं. अपनी बड़ी आबादी के बावजूद कुर्दों का अपना कोई पूरी तरह से आजाद देश नहीं है. कई दशकों से कई कुर्द ग्रुप कुर्दिस्तान नाम का एक आजाद देश बनाने की वकालत करते रहे हैं.

किन देशों में है कुर्द आबादी

कुर्द आबादी चार बड़े मिडिल ईस्ट देशों में फैली हुई है. यहां वे ज्यादातर एथनिक माइनॉरिटी के तौर पर रहते हैं. तुर्की में दुनिया की सबसे बड़ी कुर्द आबादी है. इसकी अनुमानित आबादी 15 से 20 मिलियन है. कुर्द कम्युनिटी ज्यादातर देश के दक्षिण पूर्वी इलाकों में रहती है. 

ईरान में कुर्द आबादी लगभग 8 से 12 मिलियन होने का अनुमान है. यह देश की आबादी का लगभग 10 प्रतिशत है. ज्यादातर ईरानी कुर्द इराकी बॉर्डर के पास पश्चिमी प्रांतों में रहते हैं. इराक में कुर्द समुदाय ने सबसे ऊंचे लेवल की पॉलिटिकल ऑटोनॉमी हासिल की है. कुर्दिस्तान रीजनल गवर्नमेंट उत्तरी इराक में एक सेमी ऑटोनॉमस इलाके को चलती है. सीरिया में लगभग डेढ़ से ढाई मिलियन कुर्द हैं. यह ज्यादातर देश के उत्तर पूर्वी हिस्सों में रहते हैं. 

कुर्दिस्तान का सपना 

कुर्द लोगों की अलग देश की मांग 20वीं सदी की शुरुआत से है. पहले वर्ल्ड वॉर के बाद ऑटोमन एम्पायर के खत्म होने के बाद एक आजाद कुर्द देश बनाने का प्रस्ताव आया. 1920 में सेव्रेस की संधि में ऐसे नियम भी शामिल थे जिनसे कुर्दिस्तान बन सकता था. लेकिन जियोपॉलीटिकल डेवलपमेंट और बाद की संधियों ने कुर्द इलाके को आसपास के देशों में बांट दिया. बस तभी से अलग-अलग देशों में कुर्दिश आंदोलन ज्यादा ऑटोनॉमी, पॉलिटिकल अधिकार या पूरी आजादी की मांग करते रहे हैं. 

ईरान को क्यों है खतरा? 

ईरान में कुर्द आबादी का सेंट्रल गवर्नमेंट के साथ लंबे समय से एक मुश्किल रिश्ता रहा है. कई कुर्द ग्रुप सुन्नी मुसलमान हैं और ईरान के पॉलिटिकल सिस्टम में शिया लीडरशिप का दबदबा है. कुछ कुर्द ऑर्गेनाइजेशंस ने सरकार पर भेदभाव और पॉलिटिकल तौर पर अलग-थलग करने का आरोप लगाया है.

ऐसा कहा जा रहा है कि अगर कुर्द ग्रुप रीजनल झगड़ों में  एक्टिवली शामिल हो जाते हैं तो वह ईरान के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं. आसपास के इलाकों में कुर्द लड़ाकों के पास पहले से ही ऑर्गेनाइज्ड मिलिशिया और ट्रेंड फोर्स है. अगर कुर्द रिबेलीयन ग्रुप बॉर्डर एरिया से कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन से शुरू करते हैं तो यह ईरान को बाहरी झगड़ों से निपटने के साथ-साथ  अंदरुनी तौर पर मिलिट्री रिसोर्सेज को दूसरी जगह लगाने के लिए मजबूर कर सकता है.

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