Hormuz Strait: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर से वैश्विक तनाव का केंद्र बन चुका है.  दरअसल ईरान ने इस रास्ते पर टोल लगना शुरू कर दिया है और साथ ही अमेरिका भी इस पर नाकाबंदी लगा रहा है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास कौन-कौन से देश हैं और वे इस रूट पर ईरान की तरह कब्जा क्यों नहीं करते? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

किस-किस का नियंत्रण? 

ईरान की तटरेखा स्ट्रेट के उत्तरी किनारे के साथ-साथ फैली हुई है. इससे उसे एक मजबूत और प्रभावी स्थिति मिलती है. दक्षिणी तरफ ओमान मुसंदम प्रायद्वीप को कंट्रोल करता है. इसी के साथ यूएई दक्षिणी जलक्षेत्र के कुछ हिस्सों से सटा हुआ है. कुवैत, कतर, बहरीन और इराक जैसे दूसरे खाड़ी देश तेल एक्सपोर्ट के लिए इस मार्ग पर काफी ज्यादा निर्भर हैं.

क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून?

वैश्विक समुद्री नियमों के तहत होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय स्ट्रेट है. इसे यह मान्यता यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी ने दी है. इसका मतलब है कि सभी देशों के जहाजों को यहां से आजादी से गुजरने का अधिकार है. ओमान जैसे देश इन नियमों का सख्ती से पालन करते हैं और इस स्ट्रेट को एक साझा वैश्विक संसाधन मानते हैं.

आर्थिक निर्भरता 

ज्यादातर खाड़ी देशों के लिए यह स्ट्रेट एक आर्थिक जीवन रेखा है. कुवैत, कतर, इराक और यहां तक की यूएई जैसे देश भी तेल और गैस के एक्सपोर्ट के लिए इसी पर निर्भर हैं. इसे रोकने की कोशिश करने या फिर कंट्रोल करने का कोई भी प्रयास सीधे तौर पर उनकी अपनी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएगा. हालांकि सऊदी अरब और यूएई के पास वैकल्पिक पाइपलाइन मौजूद हैं लेकिन वे एक्सपोर्ट की पूरी मात्रा को संभालने में सक्षम नहीं हैं.

ईरान को फायदा 

ईरान का भूगोल उसे एक बड़ा फायदा पहुंचता है. इसकी तटरेखा पहाड़ों से घिरी हुई है और छोटे-छोटे द्वीपों से सजी है. इससे उसे मिसाइल, ड्रोन और नौसैनिक बारूदी सुरंगों को प्रभावित ढंग से तैनात करने की सुविधा मिलती है. इससे ईरान के लिए दबाव डालना या शिपिंग मार्गों को धमकाना आसान हो जाता है. 

वैश्विक सैन्य प्रतिक्रिया का जोखिम 

कोई भी देश जो इस स्ट्रेट पर कंट्रोल स्थापित करने का प्रयास करेगा उसे तत्काल और तीव्र अंतरराष्ट्रीय विरोध का सामना करना पड़ेगा. अमेरिका और उसके सहयोगी नौवहन की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए इस क्षेत्र में अपनी नौसेना की मजबूत मौजूदगी बनाए रखते हैं. 

दूसरे देश ईरान के जैसे ग्रे जोन वाली रणनीतियों का इस्तेमाल करने से बचते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि वे स्थिरता, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को ज्यादा अहमियत देते हैं. उनके लिए स्ट्रेट को खुला रखना उस पर नियंत्रण करने की कोशिश करने से कहीं ज्यादा फायदेमंद होता है.

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