India Middle East Relations: ईरान इस वक्त अमेरिका और इजरायल के साथ जंग कर रहा है. इस जंग की वजह से पूरे मिडल ईस्ट में अशांति छाई हुई है. लेकिन मुगल काल में भारत ने मिडल ईस्ट के साथ गहरे डिप्लोमेटिक, कल्चरल और कमर्शियल रिश्ते बनाए. ईरान का सफवीद साम्राज्य और तुर्की का ऑटोमन साम्राज्य मुगल साम्राज्य के सबसे जरूरी पार्टनर थे. यह रिश्ता सिर्फ डिप्लोमेसी तक ही सीमित नहीं था. इन रिश्तों में व्यापार, धार्मिक संबंध और कल्चरल लेनदेन भी शामिल थे. 

Continues below advertisement

ईरान के साथ करीबी रिश्ते 

मिडिल ईस्ट की ताकतों में मुगलों का पर्शिया के साथ सबसे मजबूत रिश्ता था. जब मुगल शासक हुमायूं शेर शाह सूरी से हारने के बाद अपना साम्राज्य खो बैठा तो उसने तहमास्प I के अंडर ईरान में शरण ली. सफवीद शासक की मिलिट्री मदद से हुमायूं भारत लौटने और मुगल गद्दी पर फिर से बैठने में कामयाब रहा. 

Continues below advertisement

मुगलों और सफवीदों के बीच कंधार विवाद 

अपने करीबी रिश्तों के बावजूद भी दोनों साम्राज्यों के बीच स्ट्रैटेजिक शहर कंधार को लेकर तनाव जारी था. मुगल और सफवीद कंधार को ट्रेड रूट और बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए काफी जरूरी मानते थे. यही वजह है कि यह शहर अक्सर दोनों साम्राज्य के बीच झगड़े का केंद्र बन जाता था. 

ऑटोमन साम्राज्य के साथ रिश्ते 

मुगल शासकों ने ऑटोमन साम्राज्य के साथ डिप्लोमेटिक और ट्रेड रिश्ते बनाए रखे थे. हालांकि कभी-कभी राजनीतिक दुश्मनी होती थी. यह इस्लामिक दुनिया में धार्मिक लीडरशिप को लेकर ज्यादा होती थी. लेकिन इसके बावजूद भी ट्रेड कोऑपरेशन एक्टिव रहा. इन रिश्तों ने भारतीय मुसलमानों को हज यात्रा पर जाने में भी मदद की.

हज यात्रा के लिए मुगल सपोर्ट 

मुगल बादशाह भारत से मक्का और मदीना के पवित्र शहरों की यात्रा करने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए रेगुलर तौर पर जहाजों का इंतजाम करते थे. उन्होंने इन शहरों में धार्मिक संस्थाओं को सपोर्ट करने के लिए पैसे के डोनेशन और तोहफे भी दिए. 

मुगल राजाओं ने मिडिल ईस्ट से क्या-क्या इंपोर्ट किया?

मिडिल ईस्ट के साथ ट्रेड से भारत को कई लग्जरी और स्ट्रैटेजिक सामान मिलते थे. सबसे जरूरी इंपोर्ट में से एक अरब और पर्शिया से हाइ ब्रीड घोड़े थे. क्योंकि भारत में मजबूत जंगी घोड़े कम थे, इस वजह से यह घोड़े मुगल घुड़सवार सेना और शाही जुलूस के लिए जरूरी थे. 

इसके अलावा फारसी कालीन भी एक और कीमती इंपोर्ट था. अपनी बारीक कारीगरी और कलात्मक डिजाइन के लिए जाने जाने वाले इश कालीनों का इस्तेमाल मुगल महलों और शाही दरबारों में बड़े पैमाने पर किया जाता था. इसी के साथ शाही किचन को भी  मिडिल ईस्ट के व्यापार से काफी फायदा होता था. खजूर, बादाम, पिस्ता और दूसरे सूखे मेवे अरब और ईरान से इंपोर्ट किए जाते थे.  इसके अलावा व्यापार में महंगे रेशमी कपड़े और वेलवेट भी शामिल थे.

यह भी पढ़ें: सड़क रास्ते से ईरान जाने में कितना वक्त लगेगा, कौन-कौन से देश पार करने होंगे?