Attack On AWACS: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के दौरान ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि ईरान ने अमेरिका के एक जरूरी बेस प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बनाया है. इसी के साथ ईरान ने एक अमेरिकी AWACS विमान को भी नष्ट कर दिया है. AWACS विमान आधुनिक युद्ध में सबसे जरूरी संपत्तियों में से एक है. इसे अक्सर यूएस एयरफोर्स की तीसरी आंख भी कहा जाता है. आइए जानते हैं कि AWACS की कीमत कितनी है और क्या है इसकी खासियत.

Continues below advertisement

कितनी है AWACS विमान की कीमत? 

एक AWACS विमान दुनिया के सबसे महंगे सैन्य प्लेटफार्मों में से एक है. अपग्रेड और सिस्टम के आधार पर इसकी एक यूनिट की कीमत लगभग 800 मिलियन डॉलर के करीब होती है. भारतीय मुद्रा में यह रकम ₹6500 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी. अमेरिका के पास ऐसे लगभग 15 से 16 विमानों का एक सीमित बेड़ा है. ऐसे में किसी भी विमान को नुकसान होना आर्थिक और रणनीतिक रूप से एक बड़ी परेशानी की बात है. 

Continues below advertisement

इसे तीसरी आंख क्यों कहा जाता है? 

बोइंग E-3 सेंट्री यानी कि AWACS सिर्फ एक विमान नहीं है. बल्कि यह उड़ता हुआ निगरानी और कमांड सेंटर है. क्षितिज से भी कहीं आगे तक देखने की इसकी क्षमता इसे खतरों को पहले ही पता लगाने और युद्ध के कई अलग-अलग क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई का तालमेल बिठाने में एक अनोखा फायदा देती है.

लंबी दूरी वाला शक्तिशाली रडार 

विमान के ऊपरी हिस्से पर एक बड़ा, घूमने वाला रडार डोम लगा होता है. यह लगभग 30 फीट चौड़ा होता है. यह सिस्टम 400 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी से विमानों, मिसाइलों और ड्रोन का पता लगा सकता है और उन पर नजर रख सकता है. इससे आने वाले खतरों की पहले ही चेतावनी मिल जाती है. 

एक साथ सैकड़ों लक्ष्यों पर नजर 

इसकी सबसे एडवांस्ड विशेषताओं में से एक है एक साथ कई लक्ष्यों पर नजर रखना. AWACS एक ही समय में 600 से भी ज्यादा टारगेट्स की निगरानी कर सकता है. इससे कमांडरों को युद्ध के मैदान की पूरी तस्वीर रियल टाइम में मिलती रहती है. 

आसमान में कमांड और कंट्रोल

खतरों का पता लगाने के अलावा यह विमान एक कमांड हब के तौर पर भी काम करता है. यह लड़ाकू विमान, नौसेना की टुकड़ी और जमीनी सेनाओं को रियल टाइम डेटा भेजता है. इससे युद्ध अभियानों के दौरान हमलों, रक्षा रणनीति और हवाई क्षेत्र के प्रबंधन में तालमेल बिठाने में मदद मिलती है. 

लंबी दूरी और सहनशक्ति 

AWACS एक ही मिशन में 9000 किलोमीटर से भी ज्यादा की दूरी तय कर सकता है. इसी के साथ यह हवा में ही ईंधन भर सकता है. AWACS पर हुए इस हमले का असर अमेरिका की ऑपरेशनल कैपेबिलिटी पर काफी गहरा पड़ेगा.

यह भी पढ़ें: भारत का रुपया तो गिर रहा लेकिन पाकिस्तान का क्या हाल, जंग के बीच जान लीजिए वैल्यू