Iran War Impact: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब सिर्फ इन तीन देशों के बीच ही नहीं रह गया है.  तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट की वजह से कई एशियाई देश गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं. कई जगहों पर हालात अब महामारी के दौर वाली पाबंदियों जैसे लगने लगे हैं.  सरकारें ईंधन बचाने और स्थिरता को बनाए रखने के लिए असाधारण कदम उठा रही हैं.

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फिलीपींस ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित किया 

फिलीपींस ने अब तक का सबसे कड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित करते हुए ईंधन संकट की चेतावनी दी है. खबरों के मुताबिक ईंधन का भंडार सिर्फ 40 से 45 दिनों तक के लिए ही बचा है. इसके चलते सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं. कारोबार के घंटे कम करना, यात्रा सीमित करना और भोजन, ईंधन व दवा जैसी जरूरत चीजों की सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है. 

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पाकिस्तान स्मार्ट लॉकडाउन की तरफ बढ़ रहा है

पाकिस्तान में भी हालात बिगड़ रहे हैं. प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ऊर्जा को बचाने के लिए वीकेंड पर स्मार्ट लॉकडाउन लगाने पर विचार कर रहे हैं. वर्क फ्रॉम होम की नीति, स्कूल को बंद करना और यात्रा पर पाबंदियां पहले से ही लागू हैं. 

दक्षिण कोरिया ने भी उठाए कदम 

दक्षिण कोरिया ने एक जन अभियान शुरू किया है. इसमें नागरिकों से ऊर्जा की खपत को कम करने का आग्रह किया गया है. सरकार ने कड़े दिशा-निर्देशों को जारी करते हुए बिजली का कम इस्तेमाल करना, रात में उपकरणों को चार्ज करने का समय सीमित करना और कम दूरी के लिए साइकिल या फिर सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने को बढ़ावा देने का आग्रह किया है.

वियतनाम ने उड़ानें रद्द कीं

वियतनाम में विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल छाए हुए हैं. वियतनाम एयरलाइंस ने कई घरेलू मार्गों पर उड़ान को निलंबित करने की घोषणा की है. जेट ईंधन की बढ़ती कीमत और सप्लाई में कमी की वजह से वियतनाम हर हफ्ते कई उड़ानें रद्द कर रहा है.

थाईलैंड ने वर्क फ्रॉम होम के नियम लागू किए

थाईलैंड में सरकार ने ऊर्जा को बचाने की कड़ी नीतियां लागू की हैं. दफ्तर अब वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था की तरफ बढ़ रहे हैं. इसी के साथ एयर कंडीशनिंग के इस्तेमाल को भी नियंत्रित किया जा रहा है और ईंधन की खपत कम करने के लिए सरकारी विदेश यात्राओं पर भी पाबंदी लगा दी गई है.

श्रीलंका ने भी उठाया कदम

श्रीलंका ने चार दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया है. ईंधन का इस्तेमाल कम करने के उद्देश्य से बुधवार को छुट्टी घोषित की गई है. अधिकारियों का ऐसा मानना है कि इस कदम से ईंधन की खपत में 25% तक की कमी आ सकती है. इससे संकट के इस दौर में कुछ हद तक राहत मिलेगी.

क्या है भारत की स्थिति? 

हालांकि भारत किसी भी तत्काल संकट का सामना नहीं कर रहा है लेकिन इसके बावजूद भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है. फ्यूल स्टेशनों पर लंबी कतारें और गिरता हुआ रुपया बढ़ते दबाव का संकेत देते हैं. हालांकि लगभग 60 दिनों के रणनीतिक भंडार को देखते हुए निकट भविष्य में लॉकडाउन जैसी स्थिति की संभावना कम ही है.

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