Strait of Hormuz: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर से दुनिया का ध्यान होर्मुज स्ट्रेट की तरफ खींचा है. ईरान ने हाल ही में इस जरूरी समुद्री रास्ते से शिपिंग पर रोक लगाने की घोषणा की. इसके बाद पूरी दुनिया में तेल की कमी की चिंता बढ़ गई है. भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति काफी ज्यादा चिंताजनक है. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत को भेजा जाने वाला लगभग 2.6 मिलियन बैरल कच्चा तेल हर दिन इसी रास्ते से गुजरता है. हालांकि ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने ऐसा कहा है कि यह रोक अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोग को ही टारगेट करती है. इसी बीच आइए जानते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट क्या है और इसे यह नाम कैसे मिला.
होर्मुज स्ट्रेट क्या है?
होर्मुज स्ट्रेट एक पतला लेकिन काफी स्ट्रैटेजिक पानी का रास्ता है जो भारत की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. यह एक मुख्य गेटवे के तौर पर काम करता है. इससे मिडल ईस्ट से तेल और गैस इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचाते हैं.
जियोग्राफिकली यह स्ट्रेट उत्तरी तरफ ईरान और दक्षिणी तरफ ओमान के मुसंदम पेनिनसुला और यूनाइटेड अरब अमीरात के बीच है. इस लोकेशन की वजह से यह दुनिया के सबसे ज्यादा एनर्जी वाले इलाकों में से एक के सेंटर में है.
ग्लोबल इंपोर्टेंस वाला एक पतला रास्ता
ग्लोबल इंपोर्टेंस के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट हैरानी की बात है कि काफी पतला है. अपने सबसे पतले पॉइंट पर यह सिर्फ लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है. इससे भी ज्यादा हैरानी की बात यह है कि तेल टैंकरों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली शिपिंग लेन हर दिशा में सिर्फ लगभग 3 किलोमीटर चौड़ी है. यानी कि क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस ले जाने वाले हजारों बड़े टैंकरों को एक काफी लिमिटेड कॉरिडोर से गुजरना पड़ता है.
दुनिया का सबसे इंपॉर्टेंट एनर्जी चोकपॉइंट
होर्मुज स्ट्रेट को अक्सर दुनिया का सबसे क्रिटिकल ऑयल चोकपॉइंट बताया जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया की कुल तेल ट्रेड का 20% से 30% इसी अकेले वॉटरवे से गुजरता है. सऊदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक जैसे बड़े तेल एक्सपोर्ट करने वाले देश एशिया, यूरोप और दूसरे ग्लोबल मार्केट में अपने एनर्जी रिसोर्स भेजने के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं.
होर्मुज स्ट्रेट को यह नाम कैसे मिला?
होर्मुज नाम की कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वजह है. एक आम थ्योरी के मुताबिक यह नाम मिडिल पर्शियन शब्द होर्मोज से जुड़ा है. यह पुराने जोरोस्ट्रियन धर्म के सबसे बड़े देवता अहुरा मज्दा से बना है. इसका मतलब है पुराने पर्शियन इस समुद्री रास्ते को पवित्र मानते थे और इसे अहुरा मज्दा की सड़क कहते थे.
एक और बड़ी वजह इतिहास से मिलती है. 11वीं और 17वीं सदी के बीच इस इलाके को होर्मुज द्वीप पर मौजूद एक अमीर व्यापारिक साम्राज्य, होर्मुज साम्राज्य कंट्रोल करता था. यह साम्राज्य पर्शिया, अरब, भारत और पूर्वी अफ्रीका को जोड़ने वाले एक बड़े कमर्शियल हब के तौर पर काम करता था. समुद्री व्यापार में इसकी अहमियत की वजह से इस पानी के रास्ते को होर्मुज की खाड़ी के नाम से जाना जाने लगा.
इसके अलावा कुछ इतिहासकारों का ऐसा कहना है कि यह नाम लोकल पर्शियन शब्द हुर मोघ से आया हो सकता है. इसका मतलब खजूर है. यह इस इलाके में आम पौधा है. ऐसा माना जाता है कि लोकल कबीले ऐतिहासिक तौर पर इस नाम का इस्तेमाल करते थे.
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