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ईरान को कौन-कौन से देश देते हैं टोल, जिन्हें होर्मुज स्ट्रेट पर रोकने जा रहा अमेरिका?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने होर्मुज में ईरान की समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है. इस कार्रवाई का मकसद उन देशों और जहाजों पर लगाम कसना है जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध ईरान को टोल दे रहे हैं.

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  • अमेरिका केवल ईरानी बंदरगाहों से व्यापार करने वाले जहाजों को रोकेगा.

दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते 'होर्मुज स्ट्रेट' पर युद्ध के बादल गहरा गए हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर ईरान की समुद्री नाकेबंदी की घोषणा कर दी है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ेगा. सोमवार रात 7:30 बजे से प्रभावी होने वाली इस नाकेबंदी के जरिए अमेरिका ने उन देशों को कड़ा संदेश दिया है जो ईरान की शर्तों पर व्यापार कर रहे हैं. इस कदम से खाड़ी देशों में तनाव चरम पर पहुंच गया है.

मिसाइल और युद्धपोतों की तैनाती

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने स्पष्ट कर दिया है कि सोमवार सुबह 10 बजे (ईस्टर्न टाइम) से होर्मुज स्ट्रेट में सघन नाकेबंदी शुरू हो गई है. भारतीय समय के मुताबिक यह कार्रवाई सोमवार रात 7:30 बजे से प्रभावी हो गई है. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले या वहां से निकलने वाले समुद्री यातायात को पूरी तरह नियंत्रित करना है. अमेरिका ने अपनी नौसेना को आदेश दिया है कि वह उन जहाजों की पहचान करे और उन्हें रोके जो अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार कर ईरान के खजाने को भरने का काम कर रहे हैं.

बिना भेदभाव के होगी सख्ती

नाकेबंदी के इस आदेश में अमेरिका ने किसी भी देश को रियायत नहीं देने की बात कही है. सेंट्रल कमांड के मुताबिक, यह नियम सभी देशों के जहाजों पर बिना किसी भेदभाव के लागू किया जाएगा. चाहे वह जहाज किसी महाशक्ति का हो या किसी छोटे देश का, यदि वह ईरानी बंदरगाहों या उसके तटीय इलाकों का उपयोग करता पाया गया, तो अमेरिकी नौसेना उसे बीच समुद्र में ही इंटरसेप्ट करेगी. ओमान की खाड़ी से लेकर अरब खाड़ी तक फैले ईरानी प्रभाव वाले हर समुद्री हिस्से पर अब अमेरिका की पैनी नजर रहने वाली है.

यह भी पढ़ें: न तेल बेच रहे और न गैस, सिर्फ टोल वसूलकर मालामाल हो रहे ये देश

कौन से जहाज ईरान को दे रहे टोल?

हालिया रिपोर्ट्स (अप्रैल 2026) के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने के लिए एक 'टोल' प्रणाली शुरू की है. इसमें जहाजों से प्रति बैरल तेल पर लगभग 1 डॉलर या प्रति जहाज 20 लाख डॉलर तक की मांग की जा रही है. चीन के कुछ जहाजों द्वारा चीनी युआन में भुगतान करने की खबरें आई हैं, जबकि रूस, भारत, पाकिस्तान और इराक जैसे देशों के जहाजों को 'मित्र' की श्रेणी में रखकर कुछ रियायतें या विशेष कोड दिए गए हैं. अमेरिका इसी 'क्रिप्टो टोल' और अवैध वसूली को रोकने के लिए सैन्य बल का प्रयोग कर रहा है.

किनको निशाना बनाएगा अमेरिका?

इस कार्रवाई की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अमेरिका ने इसे 'चयनात्मक नाकेबंदी' का नाम दिया है. इसका मतलब यह है कि अमेरिकी नौसेना केवल उन्हीं जहाजों को निशाना बनाएगी जो ईरानी बंदरगाहों से व्यापार कर रहे हैं. खाड़ी के अन्य देशों, जैसे संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत या सऊदी अरब के बंदरगाहों पर जाने वाले जहाजों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं होगी. अमेरिका का तर्क है कि वह केवल उन आर्थिक गतिविधियों को ठप करना चाहता है जिनसे ईरान की सैन्य ताकत को मजबूती मिल रही है.

अमेरिकी नौसेना ने जारी की सख्त एडवाइजरी

व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी नौसेना ने एक आधिकारिक 'नोटिस टू मैरिनर्स' जारी किया है. इसमें साफ कहा गया है कि ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास काम करने वाली सभी नावों और जहाजों को ब्रिज-टू-ब्रिज चैनल 16 के जरिए अमेरिकी नेवी के संपर्क में रहना होगा. किसी भी प्रकार की गलतफहमी या अप्रिय घटना से बचने के लिए समुद्री बेड़ों को सलाह दी गई है कि वे नाकेबंदी के नियमों का सख्ती से पालन करें और अमेरिकी चेतावनी को नजरअंदाज न करें.

ईरानी टोल और अवैध वसूली का विवाद

पिछले कुछ समय से ऐसी खबरें आ रही थीं कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से भारी-भरकम 'सुरक्षा शुल्क' या टोल वसूल रहा है. चीन और कुछ अन्य देशों की निजी शिपिंग कंपनियों द्वारा इस टोल को देने की पुष्टि हुई थी. अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जबरन वसूली मान रहा है. चूंकि होर्मुज एक प्राकृतिक समुद्री रास्ता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत वहां किसी भी प्रकार का टोल वसूलना अवैध है. अमेरिका इसी अवैध वसूली को रोकने के लिए अपनी सैन्य ताकत का उपयोग कर रहा है.

यह भी पढ़ें: Lithium Reserves: किस देश के पास है सबसे ज्यादा लिथियम, जानें किस चीज में होता है इसका इस्तेमाल?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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