‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ एक डिजिटल टोकन है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप की सहयोगी कंपनी सीआईसी डिजिटल एलएलसी ने लॉन्च किया है. इस कंपनी ने पहले ट्रंप के नाम से ब्रांडेड उत्पाद बेचे थे और अब यह क्रिप्टोकरेंसी के क्षेत्र में कदम रख रही है. टोकन की शुरुआती बिक्री सितंबर 2025 में शुरू हुई और अब यह प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंजों पर ट्रेड हो रहा है. कंपनी ने लगभग 200 मिलियन डिजिटल टोकन जारी किए हैं और अगले तीन वर्षों में 800 मिलियन और टोकन जारी करने की योजना है.

 ट्रंप और क्रिप्टोकरेंसी

कभी क्रिप्टोकरेंसी के आलोचक रहे डोनाल्ड ट्रंप अब इसके समर्थक बन गए हैं. ट्रंप का मानना है कि क्रिप्टो इंडस्ट्री अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकती है. उनकी इस नीति से क्रिप्टो बाजार में उत्साह है और निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि उनके प्रशासन से इस क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा. ‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ टोकन ने क्रिप्टो बाजार में नई हलचल पैदा की है और ट्रंप के समर्थन ने इसे और आकर्षक बनाया है. 

 भारत में क्रिप्टोकरेंसी की स्थिति

सामान्य तौर पर क्रिप्टोकरेंसी भौगोलिक रूप से सीमित नहीं है और कोई भी व्यक्ति दुनिया में कहीं से भी इसमें निवेश कर सकता है. लेकिन कुछ देशों को छोड़कर जिनके पास इसके खिलाफ कानून हों. भारत की बात करें तो साल 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टो के पक्ष में फैसला सुनाया था जिसमें RBI द्वारा इसपर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया था.

क्या भारतीय निवेशक खरीद सकते हैं?

भारतीय निवेशक प्रमुख वैश्विक क्रिप्टो एक्सचेंजों, जैसे बिनांस या कॉइनबेस के माध्यम से $WLFI टोकन खरीद सकते हैं, बशर्ते ये प्लेटफॉर्म भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध हों. हालांकि, भारतीय कानूनों के तहत क्रिप्टोकरेंसी में निवेश को लेकर कई पाबंदियां हैं. क्रिप्टो खरीदने के लिए भारतीय निवेशकों को पहले रुपये को डॉलर में बदलना होगा, जो कुछ बैंकों और एक्सचेंजों के माध्यम से संभव है. लेकिन, यहां सावधानी बरतना जरूरी है. क्रिप्टोकरेंसी में निवेश अत्यधिक जोखिम भरा है, क्योंकि इसकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि $WLFI जैसे टोकन की कीमतें शुरुआती प्रचार के कारण बढ़ सकती हैं, लेकिन बाद में गिरावट का जोखिम भी रहता है. इसके अलावा, भारत में क्रिप्टो से होने वाली आय पर 30% टैक्स और 1% TDS लागू होता है, जो निवेशकों के मुनाफे को प्रभावित कर सकता है.

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