India Electricity Export: नेपाल ने दिसंबर 2026 और मई 2027 के बीच अपनी बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए भारत से 1100 MW बिजली इंपोर्ट करने का फैसला किया है. यह फैसला हाल ही में आई एक आपदा में नेपाल की कई पनबिजली परियोजनाओं के क्षतिग्रस्त होने और इससे बिजली उत्पादन पर असर पड़ने के बाद लिया गया है. मरम्मत का काम चल रहा है और इस दौरान भारत नेपाल की बिजली की मांग को पूरा करने में मदद करेगा. यह दक्षिण एशिया में एक प्रमुख बिजली आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है.

Continues below advertisement

भारत किन देशों को बिजली की आपूर्ति करता है? 

भारत मुख्य रूप से सीमा पार बिजली व्यापार और आपस में जुड़े ट्रांसमिशन नेटवर्क के जरिए अपने पड़ोसी देशों को बिजली की आपूर्ति करता है. भारत से बिजली प्राप्त करने वाले मुख्य देशों में नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार शामिल हैं. श्रीलंका के साथ ग्रिड कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने का काम भी चल रहा है. 

Continues below advertisement

भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय बिजली व्यापार समझौता है. भारत नेपाल को खास तौर से सर्दियों और सूखे के मौसम में बिजली की आपूर्ति करता है. उस वक्त नेपाल की नदियों में पानी का स्तर कम हो जाता है और पनबिजली उत्पादन प्रभावित होता है.

नेपाल की बिजली परियोजनाओं को हाल ही में हुए नुकसान के बाद भारत ने प्रतिदिन 18 घंटे तक बिजली आपूर्ति को मंजूरी दी है. इसमें जरूर के हिसाब से आपूर्ति लगभग 654 मेगावाट से  1100 मेगावाट तक होगी.

भारत बांग्लादेश को भी बिजली की आपूर्ति करता है 

भारत कई सालों से बांग्लादेश को बड़ी मात्रा में बिजली की आपूर्ति कर रहा है. सीमा पार ट्रांसमिशन नेटवर्क ने दोनों देशों के लिए क्षेत्रीय बिजली व्यापार में भाग लेना मुमकिन बना दिया है.

भारत का ट्रांसमिशन नेटवर्क नेपाल से बांग्लादेश को बिजली निर्यात करने में भी भूमिका निभाता है. इससे नेपाल में उत्पादित बिजली भारत के ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए बांग्लादेश तक पहुंच पाती है. 

भूटान और म्यांमार के साथ बिजली व्यापार 

भूटान और म्यांमार के साथ भी भारत के सीमा पार बिजली व्यापार और ग्रिड कनेक्टिविटी समझौते हैं. यह कनेक्शन दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने और आपस में जुड़े बिजली बाजार स्थापित करने के भारत के प्रयासों का हिस्सा हैं. 

भारत नेपाल को किस दर पर बिजली बेचेगा?

पावर एक्सचेंज कमेटी के हालिया समझौते के तहत भारत द्वारा नेपाल को आपूर्ति की जाने वाली बिजली की कीमत उस ट्रांसमिशन लाइन के वोल्टेज स्तर के आधार पर तय की जाएगी जिसके जरिए बिजली की आपूर्ति की जाती है. दर इस प्रकार हैं:

  • 132 किलोवाट ट्रांसमिशन लाइन: एनपीआर 8.22 प्रति यूनिट
  • 33 किलोवाट ट्रांसमिशन लाइन: एनपीआर 8.91 प्रति यूनिट
  • 11 किलोवाट ट्रांसमिशन लाइन: एनपीआर 9.55 प्रति यूनिट 

इस वजह से लागू होने वाली दर इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन सा ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर इस्तेमाल किया जा रहा है . इन तीनों कैटेगरी में से सबसे ज्यादा वोल्टेज वाली 132 किलोवाट लाइन से सप्लाई होने वाली बिजली की दर सबसे कम है. इसी के साथ 11 किलोवाट सप्लाई की दर सबसे ज्यादा है.

क्या बिजली की कीमत और बढ़ सकती है? 

बाजार की स्थिति और इमरजेंसी जरूरत के आधार पर बिजली की कीमत बदल सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक इंडियन एनर्जी एक्सचेंज पर मांग में उतार-चढ़ाव और कुछ खास इमरजेंसी स्थिति की वजह से औसत दर लगभग एनपीआर 11 प्रति यूनिट तक पहुंच सकती है. 

नेपाल के लिए यह व्यवस्था उस समय अतिरिक्त बिजली मौजूद कराती है जब हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचने की वजह से घरेलू उत्पादन कम हो जाता है. भारत के लिए इस तरह का क्रॉस बॉर्डर बिजली व्यापार क्षेत्र में एक जरूरी बिजली आपूर्तिकर्ता के तौर पर उसकी स्थिति को मजबूत करता है.

यह भी पढ़ें: दिरहम या रुपया, किस करेंसी में मिलती है पायलट मच्छार को सैलरी?

नेपाल के लिए इस समझौते का क्या मतलब है?

बिजली की यह व्यवस्था नेपाल के लिए खास तौर पर जरूरी है क्योंकि उसका बिजली उत्पादन काफी हद तक हाइड्रोपावर पर निर्भर करता है. जब हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचता है या फिर नदी के पानी का स्तर गिरता है तो घरेलू बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इस वजह से भारत की सप्लाई नेपाल को ऐसे समय में बिजली की उपलब्धता बनाए रखने में मदद कर सकती है जब उसके क्षतिग्रस्त प्रोजेक्ट की मरम्मत चल रही हो.

यह भी पढ़ें: कितना खतरनाक है गोल्डी बराड़, क्यों FBI ने किया इसे मोस्ट वांटेड घोषित?