कोलकाता से दिल्ली आ रही इंडिगो की फ्लाइट 6E-719 उस समय विवादों के केंद्र में आ गई, जब तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ यात्रियों के एक समूह ने नारेबाजी शुरू कर दी. विमान के भीतर हुए इस हंगामे ने न केवल सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विमानन नियमों की सख्ती को भी चर्चा में ला दिया है. महुआ मोइत्रा ने इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू से हस्तक्षेप की मांग की है और दोषियों को नो-फ्लाई लिस्ट में डालने की अपील की है. आइए जानें कि इस मामले में कितनी सजा मिलती है.

Continues below advertisement

विमान के भीतर नारेबाजी और सुरक्षा के नियम

विमान के अंदर किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन या नारेबाजी करना साधारण बात नहीं है. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऐसी हरकतों को अव्यवस्थित व्यवहार (Unruly Behaviour) की श्रेणी में रखा जाता है. हाल ही में DGCA ने अपने नियमों को और अधिक सख्त बनाया है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और शांति सुनिश्चित की जा सके. विमान के उड़ान भरते ही यात्री को वहां के अनुशासन का पालन करना अनिवार्य होता है और किसी भी प्रकार का शोर-शराबा सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन माना जाता है.

Continues below advertisement

DGCA की नई कैटेगरी और सख्त पाबंदियां

विमानन नियामक ने हाल के दिनों में अपने नियमों में छह नए वर्ग जोड़े हैं. इनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में धूम्रपान करना, शराब पीकर हंगामा करना, आपातकालीन निकास का गलत इस्तेमाल करना और विशेष रूप से नारेबाजी या विरोध प्रदर्शन में शामिल होना शामिल है. यदि कोई यात्री नशे की हालत में अनियंत्रित व्यवहार करता है या चिल्लाकर अन्य यात्रियों को परेशान करता है, तो एयरलाइंस को उसके खिलाफ तत्काल कठोर कदम उठाने का कानूनी अधिकार प्राप्त है.

यह भी पढ़ें: एफआईआर दर्ज हुई तो क्या सीएम नहीं बन पाएंगे विजय, जानें क्या कहता है कानून?

एयरलाइन के पास कार्रवाई करने की बड़ी ताकत

नागरिक उड्डयन आवश्यकताएं (CAR) और एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के तहत विमान के अंदर नारेबाजी करना दंडनीय अपराध है. जैसे ही क्रू को ऐसी किसी स्थिति का पता चलता है, वे संबंधित यात्री को तुरंत रोकने के लिए अधिकृत होते हैं. यदि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तो पायलट-इन-कमांड के पास अधिकार होता है कि वह विमान को नजदीकी एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करा दे. इसके बाद हंगामा करने वाले यात्री को स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया जाता है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू होती है.

अपराध की गंभीरता और नो-फ्लाई लिस्ट का प्रावधान

सजा का निर्धारण अपराध की गंभीरता के आधार पर किया जाता है. छोटे या हल्के अपराधों के लिए यात्री पर 3 दिन से लेकर 30 दिन तक का यात्रा प्रतिबंध (बैन) लगाया जा सकता है. वहीं, अगर नारेबाजी या व्यवहार गंभीर प्रकृति का पाया जाता है, तो यात्री को 1 से 2 साल या उससे भी अधिक समय के लिए नो-फ्लाई लिस्ट में डाल दिया जा सकता है. इसका मतलब है कि वह व्यक्ति निर्धारित समय तक किसी भी एयरलाइन से यात्रा नहीं कर पाएगा. कुछ दुर्लभ मामलों में केवल लिखित चेतावनी देकर भी छोड़ा जाता है, लेकिन मामला राजनीतिक या सुरक्षा से जुड़ा हो तो कार्रवाई कड़ी होती है.

एयरक्राफ्ट रूल 23 के तहत जेल और जुर्माना

विमानन नियमों की धारा यानी एयरक्राफ्ट रूल 23 के अंतर्गत केवल यात्रा प्रतिबंध ही नहीं, बल्कि जुर्माने और जेल की सजा का भी प्रावधान है. विमान की सुरक्षा में खलल डालना एक गंभीर विषय है क्योंकि हवा में हजारों फीट की ऊंचाई पर किसी भी प्रकार का तनाव बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है. महुआ मोइत्रा के मामले में अब मंत्रालय और इंडिगो एयरलाइन की आंतरिक कमेटी वीडियो साक्ष्यों की जांच करेगी, जिसके बाद दोषियों पर सजा का फैसला लिया जाएगा.

यह भी पढ़ें: First EVM Election: देश में पहली बार EVM से कब हुई थी वोटिंग? 99% लोग देते हैं गलत जवाब