Powerful Missile: मिलिट्री टेक्नोलॉजी के इस मॉडर्न जमाने में मिसाइलों को अब सिर्फ इस बात से नहीं आंका जाता कि वह कितनी दूर तक उड़ सकती हैं, बल्कि इस बात से भी कि उन्हें रोकना कितना मुश्किल है. मौजूदा सभी हथियारों में रेंज, स्पीड, पेलोड और डिफेंस सिस्टम से बचने की क्षमता के मामले में एक मिसाइल बाकी सभी मिसाइलों को काफी पीछे छोड़ देती है. इस मिसाइल का नाम है RS-28 सरमत. इसे दुनिया में कहीं भी तैनात सबसे शक्तिशाली मिसाइल माना जाता है और यह रूस की मिसाइल है. 

Continues below advertisement

रूस का सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार 

सरमत एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है. इसे रूस ने सोवियत युग की पुरानी सैटन मिसाइल को बदलने के लिए बनाया है. इसकी सबसे डरावनी खासियत इसकी लगभग 18000 किलोमीटर की जबरदस्त रेंज है जो इसे धरती पर लगभग किसी भी टारगेट को हिट करने की इजाजत देती है. यह रेंज रूस को गैर पारंपरिक दिशाओं से हमला करने की फ्लैक्सिबिलिटी देती है.

Continues below advertisement

ऐसी स्पीड जिसे रोकना नामुमकिन 

स्पीड एक और वजह है जिससे सरमत को रोकना लगभग नामुमकिन है. यह मिसाइल 25000 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से उड़ सकती है. इतनी तेज स्पीड पर पता लगाने का समय काफी कम होता है और मौजूदा डिफेंस टेक्नोलॉजी से इसे रोकना लगभग नामुमकिन ही है. 

इसी के साथ इस मिसाइल के सबसे खतरनाक पहलुओं में से एक इसकी मल्टीपल इंडिपेंडेंट टारगेटेबल री एंट्री व्हीकल क्षमता है. एक अकेली मिसाइल 10 से 15 न्यूक्लियर वारहेड ले जा सकती है. इसमें से हर एक अलग शहर या मिलिट्री टारगेट पर हमला करने में सक्षम है. इसका मतलब है कि एक लॉन्च एक साथ कई इलाकों को तबाह कर सकता है. 

मिसाइल डिफेंस को चकमा देना 

सरमत अवांगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भी ले जा सकती है. यह उड़ान के बीच में दिशा बदलने में सक्षम है. पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल के उलट जो अनुमानित रास्ते पर चलती है अवांगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल हाइपरसोनिक स्पीड से पैंतरेबाजी करते हैं. इस वजह से मौजूद मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए उन्हें ट्रैक करना या फिर नष्ट करना लगभग नामुमकिन हो जाता है.

इसी के साथ दुनिया के ज्यादातर मिसाइल डिफेंस सिस्टम उत्तरी ध्रुव के आसपास केंद्रित हैं क्योंकि वह उस दिशा से हमले की उम्मीद करते हैं. इसके बजाय आरएस 28 सरमत दक्षिणी ध्रुव के रास्ते टारगेट तक पहुंच सकती है. इससे रडार कवरेज में मौजूद कमियों का फायदा उठाया जा सकता है और रोकने की संभावना और भी कम हो जाती है.

ये भी पढ़ें: यूपी का नाम यूपी कैसे पड़ा, अंग्रेज या मुगल किससे है इसका असली कनेक्शन?