पाकिस्तान को दुनिया भर में मुस्लिम बहुल देश के तौर पर जाना जाता है, लेकिन इसी देश में कुछ ऐसे इलाके भी हैं, जहां हिंदू समुदाय आज भी बड़ी संख्या में रहते हैं. भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी लगातार घटती गई, फिर भी सिंध प्रांत के कुछ जिलों में उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक मौजूदगी आज भी मजबूत मानी जाती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि पाकिस्तान का सबसे ज्यादा हिंदू आबादी वाला शहर कौन सा है और यहां पर कितने हिंदू रहते हैं. 

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पाकिस्तान में कितने रहते हैं हिंदू? 

2023 की जनगणना के अनुसार पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी करीब 39 लाख है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 1.6 प्रतिशत है. हालांकि कई हिंदू संगठनों का दावा है कि वास्तविक संख्या इससे ज्यादा हो सकती है. पाकिस्तान के लगभग 90 प्रतिशत हिंदू सिंध प्रांत में रहते हैं, जबकि पंजाब, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में भी हिंदू फैले हुए हैं. 

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सिंध में है हिंदुओं का सबसे बड़ा आधार 

पाकिस्तान में सिंध प्रांत हिंदू आबादी का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां के थारपारकर, उमरकोट और मीरपुर खास और संघर जैसे जिलों में हिंदू समुदाय की बड़ी आबादी रहती है. थारपारकर और उमरकोट भारत की सीमा से लगे इलाके हैं और यहां आज भी हिंदू संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. 

हिंदू आबादी वाला सबसे बड़ा शहर 

पाकिस्तान में हिंदू आबादी वाले शहरों में सबसे ज्यादा चर्चा थारपारकर जिले के मुख्यालय मिठी और उमरकोट जिले की होती है, जहां हिंदू आबादी पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों की तुलना में कहीं ज्यादा है. इनमें भी थारपारकर जिले का मुख्यालय मिठी पाकिस्तान के सबसे चर्चित हिंदू बहुल शहरों में गिना जाता है, यहां की आबादी करीब 87,000 बताई जाती है, जिसमें लगभग 80 प्रतिशत हिंदू समुदाय से हैं. यही वजह है कि इस शहर की सामाजिक पहचान पाकिस्तान के दूसरे शहरों से अलग मानी जाती है. स्थानीय परंपराओं के अनुसार यहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय आपसी सद्भावना के साथ रहते हैं. यहां कई मुस्लिम परिवार गाय का मांस नहीं खाते और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं. दिवाली और ईद जैसे त्योहारों पर दोनों समुदाय एक-दूसरे के साथ मिलकर त्यौहार मनाते हैं. कई हिंदू मोहर्रम के जुलूस में भाग लेते हैं, जबकि कुछ मुस्लिम दिवाली के आयोजन में भी शामिल होते हैं. 

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उमरकोट भी है हिंदू बहुल जिला 

उमरकोट पाकिस्तान का दूसरा प्रमुख हिंदू बहुल जिला माना जाता है, यहां की कुल आबादी करीब 10.7 लाख है, जिसमें लगभग 52 प्रतिशत लोग हिंदू है. यह जिला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है. रिपोर्ट के अनुसार यहां खेती से जुड़े मजदूरों में बड़ी संख्या हिंदू दलित समुदाय की है, जबकि व्यापार और सर्राफा बाजार में भी हिंदू समुदाय की अच्छी हिस्सेदारी बताई जाती है.

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