World Weakest Currency: जब भी लोग दुनिया की सबसे कमजोर करेंसी के बारे में बात करते हैं तो ईरान लगभग हमेशा इस लिस्ट में सबसे ऊपर होता है. दिसंबर 2025 तक ईरानी रियाल को दुनिया भर में सबसे ज्यादा डीवैल्यूड करेंसी में से एक माना जाता है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह और साथ ही यह भी कि भारत के ₹10000 की कीमत ईरान में कितनी होगी.

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ईरान में ₹10000 की कीमत 

वर्तमान विनियम दर के मुताबिक एक भारतीय रुपया लगभग 468.78 ईरानी रियाल के बराबर है. इसका मतलब है कि अगर आप ₹10000 एक्सचेंज करते हैं तो आपको लगभग 46,87,800 ईरानी रियाल मिलेंगे. कागज पर यह काफी बड़ी रकम लगती है लेकिन असल में यह दिखाती है कि रियाल की खरीदने की शक्ति कितनी तेजी से कम हुई है.

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ईरानी रियाल इतना कमजोर क्यों है?

ईरानी रियाल का गिरना अचानक नहीं हुआ है. ऐसा दशकों से होता आ रहा है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंध. खासकर वे प्रतिबंधित जो संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाए हैं. इन प्रतिबंधों ने तेल निर्यात को सीमित कर दिया है और ईरान को वैश्विक बैंकिंग सिस्टम से काटने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा के प्रवाह को तेजी से कम कर दिया है. बैन के साथ-साथ ज्यादा महंगाई ने भी इस विनाश में एक बड़ी भूमिका निभाई है. 2025 के आखिर तक ईरान में महंगाई दर लगभग 40% के आसपास थी. 

कई एक्सचेंज दरें और रोजाना का कन्फ्यूजन 

ईरान में मल्टी टियर एक्सचेंज रेट सिस्टम चलता है. एक आधिकारिक सरकारी दर है और एक बहुत कमजोर फ्री मार्केट दर. इसका इस्तेमाल ज्यादातर आम नागरिक करते हैं. इन दरों के बीच का अंतर अक्सर कन्फ्यूजन, सट्टेबाजी और अमेरिकी डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं की जमाखोरी की वजह बनता है. वैसे तो आधिकारिक करेंसी रियाल है लेकिन लोग आमतौर पर कीमतें तोमान में बताते हैं. एक तोमान 10 रियाल के बराबर होता है. इससे और ज्यादा कन्फ्यूजन होती है.

यात्रियों को क्या जानना चाहिए?

दरअसल भारतीय रुपया को सीधे ईरानी रियाल में बदलना काफी मुश्किल है. ऐसा इसलिए क्योंकि रियाल का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा लेन-देन नहीं होता है. ज्यादातर यात्री अमेरिकी डॉलर या फिर यूरो लेकर जाते हैं और उन्हें ईरान में स्थानीय स्तर पर बदल लेते हैं. बैन की वजह से डिजिटल पेमेंट, इंटरनेशनल डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड काम नहीं करते.

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