Nuclear Weapons: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भू राजनीतिक तनाव और असफल शांति वार्ता के दौरान दुनिया का ध्यान एक बार फिर परमाणु क्षमता की तरफ मुड़ गया है. दिलचस्प बात यह है कि जिस तरफ कई देश परमाणु हथियार बनाने की होड़ में लगे हैं वहीं एक देश ऐसा भी है जिसके पास यूरेनियम का सबसे बड़ा भंडार है. लेकिन इसके बावजूद भी उसने परमाणु हथियार ना बनाने का फैसला किया है. आइए जानते हैं क्यों.
बिना परमाणु हथियारों वाला यूरेनियम का भंडार
ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया के कुल यूरेनियम भंडार का लगभग 29 से 33% हिस्सा है. यह लगभग 1.7 से 1.96 मिलियन टन के बराबर है. यह इसे दुनिया भर में परमाणु ईंधन का सबसे बड़ा अकेला स्रोत बनाता है. हालांकि हथियारों के लिए इसका इस्तेमाल करने के बजाय ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम का एक्सपोर्ट पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए करता है.
परमाणु अप्रसार संधि
ऑस्ट्रेलिया के पास परमाणु हथियार ना होने की सबसे बड़ी वजह परमाणु अप्रसार संधि है. इस संधि पर हस्ताक्षर करके ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु हथियार ना बनाने या फिर हासिल ना करने और वैश्विक परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रयास का समर्थन करने का संकल्प लिया है.
क्या है घरेलू कानून?
ऑस्ट्रेलिया ने कड़े आंतरिक कानून भी लगाए हैं. इन कानून के तहत परमाणु हथियारों के विकास पर रोक लगाई गई है और साथ ही परमाणु ऊर्जा उत्पादन को भी सीमित किया गया है. इसका मतलब है कि देश ने संसाधन होने के बावजूद अपनी मर्जी से हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की अपनी क्षमता को सीमित कर लिया है.
अमेरिका से मिली सुरक्षा
ऑस्ट्रेलिया को अपना परमाणु जखीरा बनाने की जरूरत इस वजह से महसूस नहीं होती क्योंकि वह काफी हद तक अमेरिका के रणनीतिक रक्षा ढांचे के तहत सुरक्षित है. यह न्यूक्लियर अंब्रेला के तहत सुरक्षा की गारंटी देता है. हालांकि ऑस्ट्रेलिया के पास परमाणु हथियार नहीं है फिर भी वह अमेरिका और ब्रिटेन के साथ हुए AUKUS एग्रीमेंट के जरिए एडवांस्ड न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कदम रख रहा है. इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया परमाणु संचालित पनडुब्बियों को हासिल करेगा. हालाँकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन पनडुब्बियों में परमाणु हथियार नहीं होंगे ये सिर्फ चलने के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग करेंगी.
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