Gun Invention: जब भी हम बंदूकों के बारे में सोचते हैं तो अक्सर ही मध्ययुगीन यूरोप और आधुनिक युद्ध की तस्वीर दिमाग में आने लगती है. लेकिन बंदूकों का असली जन्म स्थान बहुत दूर पूरब में है. यूरोप में मस्केट और तोपों के आने से काफी पहले चीन ने पहले ही बंदूक टेक्नोलॉजी की नींव रख दी थी. आइए जानते हैं कैसे हुआ था बंदूक का आविष्कार.

Continues below advertisement

चीन और बारूद का जन्म 

बंदूक का आविष्कार चीन में हुआ था और इसकी उत्पत्ति नौवीं सदी तक खोजी जा सकती है. ताओवादी कीमियागर, अमरता का अमृत ढूंढते समय गलती से सल्फर, चारकोल और शोरा मिलाकर बारूद की खोज कर बैठे. अमर जीवन के बजाय उन्होंने मानव इतिहास के सबसे शक्तिशाली पदार्थ में से एक का आविष्कार कर दिया. इस खोज का जल्द ही सैन्य इस्तेमाल होने लगा. 

Continues below advertisement

दुनिया की पहली बंदूक 

10वीं और 12वीं सदी के बीच चीनी इंजीनियरों ने फायर लांस विकसित किया. इस दुनिया की पहली बंदूक जैसा हथियार माना जाता है. इसमें एक बांस या फिर धातु की नली होती थी जो भाले के सिरे पर लगी होती थी. जब इसे जलाया जाता था तो इससे आग की लपटें, धुआं और कभी-कभी मिट्टी के टुकड़े, धातु की गोलियां या फिर तीर जैसे नुकीले टुकड़े निकलते थे.

पहला युद्ध क्षेत्र में इस्तेमाल 

बंदूक के सबसे पुराने दर्ज सैन्य इस्तेमाल का पता 1132 ईस्वी में डेआन की घेराबंदी के दौरान चलता है. इस समय सोंग राजवंश के सैनिकों ने उत्तर से आए जुरचेन हमलावरों के खिलाफ बंदूक का इस्तेमाल किया था. रिकॉर्ड्स के मुताबिक लड़ाई के दौरान ऐसे लगभग 20 हथियार तैनात किए गए थे. 

एडवांस्ड बंदूक का उदय 

13वीं सदी के अंत तक चीनी हथियार फायर लांस से विकसित होकर पूरी दुनिया से धातु की बैरल और बोर में फिट होने के लिए डिजाइन किए गए प्रोजेक्टाइल वाली असली बंदूक में बदल गए. हेलोंगजियांग हैंड कैनन जो लगभग 1288 एडी की है, दुनिया की सबसे पुरानी बची हुई बंदूक मानी जाती है.

बंदूकें बाकी दुनिया में कैसे फैली?

बंदूकों का दुनिया भर में फैलना तब शुरू हुआ जब 13वीं सदी में मंगोल साम्राज्य एशिया, मिडल ईस्ट और यूरोप के कुछ हिस्सों तक फैला. व्यापार मार्गों और मिलिट्री अभियानों के साथ बंदूक की टेक्नोलॉजी पश्चिम की तरफ फैली. वक्त के साथ यह शुरुआती चीनी आविष्कार तोप, मस्केट और आखिरकार आधुनिक बंदूकों में बदल गए.

ये भी पढ़ें:  ये है दुनिया की सबसे गहरी जगह, जिसमें डूब जाएगा पूरा माउंट एवरेस्ट