World Most Expensive Electricity: दुनिया भर में बिजली की कीमतें अलग-अलग होती हैं. लेकिन एक देश ऐसा है जहां पर बिजली की कीमत सबसे ज्यादा है. बरमूडा में दुनिया की सबसे महंगी बिजली मिलती है. यहां घरों को  प्रति किलोवाट घंटा लगभग 0.46 से 0.47 अमेरिकी डॉलर यानी कि लगभग ₹38 से ₹40 प्रति यूनिट चुकानी पड़ती है. यूरोप की बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में जर्मनी, इटली और आयरलैंड भी उन देशों में शामिल है जहां बिजली की लागत सबसे ज्यादा है.

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बरमूडा पूरी तरह से आयातित ईंधन पर निर्भर 

बरमूडा में महंगी बिजली का एक सबसे बड़ा कारण आयातित जीवाश्म ईंधन पर इसकी पूरी निर्भरता है. एक छोटा द्वीप देश होने की वजह से बरमूडा के पास ऊर्जा के बड़े घरेलू स्रोत नहीं हैं और साथ ही यह अपनी ज्यादातर बिजली आयातित डीजल और तेल का इस्तेमाल करके बनाता है. क्योंकि ईंधन विदेश से मंगाना पड़ता है इस वजह से वैश्विक तेल की कीमतों में किसी भी बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं के लिए बिजली की लागत बढ़ जाती है. 

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टैक्स और ग्रीन एनर्जी चार्ज के बिल बढ़ते हैं 

जर्मनी जैसे देशों में बिजली के बिलों में न सिर्फ बिजली बनाने की लागत शामिल होती है बल्कि भारी सरकारी टैक्स और पर्यावरण से जुड़े शुल्क भी शामिल होते हैं. इन रिन्यूएबल एनर्जी सरचार्ज का इस्तेमाल ऊर्जा के साफ स्रोत की तरफ बढ़ने में मदद के लिए किया जाता है. साथ ही लागत का एक बड़ा हिस्सा बिजली की ऊंची दरों के जरिए उपभोक्ताओं पर डाला जाता है.

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पावर ग्रिड बनाए रखना महंगा 

इटली और आयरलैंड जैसे देशों में भी बिजली की कीमत इस वजह से ज्यादा है क्योंकि उन्हें अपने पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने और अपग्रेड करने में काफी खर्च करना पड़ता है. बिजली ग्रिड को मजबूत करने, दूर-दूर तक फैली आबादी तक बिजली पहुंचाने और डेटा सेंटर जैसी सुविधाओं की बढ़ती ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत होती है. यह सभी खर्च उपभोक्ता के बिजली बिल में दिखता है.

छोटे बाजार का मतलब है प्रति उपभोक्ता ज्यादा लागत 

कम आबादी वाले द्वीप देशों में पावर प्लांट और ट्रांसमिशन नेटवर्क बनाने और बनाए रखने की लागत को बांटने के लिए बिजली उपभोक्ता की संख्या कम होती है. यही वजह है कि ज्यादा आबादी और बड़े बिजली नेटवर्क वाले देशों की तुलना में प्रति घर इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत काफी ज्यादा हो जाती है.

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