Fastest Internet: ऐसे समय में जब स्ट्रीमिंग, गेमिंग और रिमोट वर्क इंटरनेट स्पीड पर काफी ज्यादा निर्भर करते हैं ग्लोबल रैंकिंग अक्सर तेजी से बदलती रहती है. अगर अल्ट्रा फास्ट कनेक्टिविटी की बात करें तो इस मामले में दो देश पूरी दुनिया में छाए हुए हैं. एक मोबाइल इंटरनेट में सबसे आगे है तो दूसरा होम ब्रॉडबैंड परफॉर्मेंस में चार्ट में सबसे ऊपर. 

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 सबसे तेज मोबाइल इंटरनेट 

यूनाइटेड अरब अमीरात के पास दुनिया का सबसे तेज मोबाइल इंटरनेट होने का टाइटल है. यहां एवरेज मोबाइल डाउनलोड स्पीड 691 एमबीपीएस से ज्यादा है. इस स्पीड पर यूजर बिना बफरिंग के 4K वीडियो स्ट्रीम कर सकते हैं,  सेकंडों में हाई डेफिनेशन मूवी डाउनलोड कर सकते हैं और लगभग तुरंत क्लाउड एक्सेस का अनुभव कर सकते हैं. देश के तेजी से 5G रोलआउट और एडवांस्ड टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर ने इस टाइटल को हासिल करने में एक बड़ी भूमिका निभाई है.

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फिक्स्ड ब्रॉडबैंड का किंग 

जब होम ब्रॉडबैंड की बात आती है तो सिंगापुर नंबर एक पर है. सिंगापुर में एवरेज फिक्स्ड ब्रॉडबैंड स्पीड लगभग 410 एमबीपीएस है.  इस कामयाबी और शानदार परफॉर्मेंस का क्रेडिट काफी हद तक पूरे देश में 99% फाइबर ऑप्टिक कवरेज को जाता है. सिंगापुर की लंबे समय से चली आ रही स्मार्ट नेशन पहल ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी इन्वेस्ट किया है. इससे स्टेबल और अल्ट्रा फास्ट होम कनेक्टिविटी पक्की हुई है. 

जापान का लैब रिकॉर्ड 

हालांकि यह कमर्शियली मौजूद नहीं है लेकिन जापान ने एक शानदार लैब रिकॉर्ड बनाया है. जापानी साइंटिस्ट ने एक्सपेरिमेंटल इंटरनेट स्पीड 1.02 पेटाबिट्स प्रति सेकंड हासिल की. अगर आसान शब्दों में कहें तो यह स्पीड इतनी पावरफुल है की थ्योरी के हिसाब से यह कुछ ही सेकंड में पूरी नेटफ्लिक्स लाइब्रेरी डाउनलोड कर सकती है.

टॉप रैंकिंग में दूसरे देश 

मोबाइल इंटरनेट स्पीड के मामले में कतर दूसरे नंबर पर है. यहां एवरेज स्पीड लगभग 573 एमबीपीएस है. इसी के साथ ब्रॉडबैंड परफॉर्मेंस में चिली लगभग 357 एमबीपीएस के साथ सिंगापुर के बाद आता है और फ्रांस लगभग 349 एमबीपीएस का रिकॉर्ड रखता है.

क्या है भारत की स्थिति? 

पूरे देश में 5G रोल आउट के बाद भारत ने काफी सुधार दिखाया है. एवरेज मोबाइल स्पीड अब 130 और 136 एमबीपीएस के बीच है. इससे भारत दुनिया भर में लगभग 26वें और 30वें पर है. हालांकि अभी भी यूएई और सिंगापुर से काफी पीछे है लेकिन भारत का तेजी से डिजिटल विस्तार आने वाले सालों में इस अंतर को कम कर सकता है.

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