जब भी पैसे की ताकत की बात होती है, तो जहन में सबसे पहले अमेरिकी डॉलर की तस्वीर उभरती है. फिल्मों से लेकर इंटरनेशनल ट्रेड तक, डॉलर हर जगह दिखाई देता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस डॉलर को दुनिया का सबसे ताकतवर माना जाता है, वह असल में वैल्यू के मामले में कई करेंसी से पीछे है? कुछ ऐसी करेंसी हैं, जिनकी एक यूनिट की कीमत डॉलर से कहीं ज्यादा है, चलिए जानें.

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डॉलर सबसे ताकतवर क्यों नहीं?

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि जिसकी करेंसी की कीमत ज्यादा है, वही देश सबसे ताकतवर होता है, लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है. करेंसी की वैल्यू कई चीजों पर निर्भर करती है, जैसे सरकार की मौद्रिक नीति, बाजार में मुद्रा की सप्लाई, विदेशी मुद्रा भंडार, तेल और गैस जैसे संसाधन और अंतरराष्ट्रीय मांग. अमेरिकी डॉलर दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली करेंसी है, लेकिन उसकी एक यूनिट की कीमत कई देशों की मुद्राओं से कम है.

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दुनिया की सबसे महंगी करेंसी

दुनिया की सबसे मजबूत करेंसी की बात करें तो कुवैती दिनार सबसे ऊपर आता है. भारत में एक कुवैती दिनार की कीमत लगभग 290 रुपये से ज्यादा है. कुवैत के पास विशाल तेल भंडार है और सरकार ने करेंसी की सप्लाई सीमित रखी है. यही वजह है कि कुवैती दिनार सालों से दुनिया की सबसे महंगी मुद्रा बना हुआ है.

बहरीन और ओमान की मजबूत मुद्राएं

कुवैत के बाद बहरीन दिनार और ओमानी रियाल का नाम आता है. बहरीन दिनार की कीमत भारतीय रुपये में करीब 230 से ज्यादा है. यह मुद्रा अमेरिकी डॉलर से जुड़ी हुई है, जिससे इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता है. वहीं ओमानी रियाल की कीमत करीब 235 से 240 रुपये के आसपास रहती है. ओमान सरकार ने जानबूझकर अपनी करेंसी की वैल्यू ऊंची रखी है और तेल निर्यात से देश को मजबूत सपोर्ट मिलता है.

जॉर्डनियन दिनार और ब्रिटिश पाउंड

जॉर्डनियन दिनार भी डॉलर से ज्यादा मजबूत माना जाता है. इसकी कीमत करीब 125 रुपये से ज्यादा है. जॉर्डन की अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन करेंसी को स्थिर रखने के लिए इसे डॉलर से जोड़कर रखा गया है. वहीं ब्रिटिश पाउंड दुनिया की सबसे पुरानी और भरोसेमंद मुद्राओं में से एक है. भारत में एक पाउंड की कीमत लगभग 120 रुपये के आसपास रहती है. लंदन का ग्लोबल फाइनेंशियल हब होना पाउंड को मजबूती देता है.

स्विस फ्रैंक, यूरो और केमैन आइलैंड्स डॉलर

स्विस फ्रैंक को दुनिया की सबसे सुरक्षित करेंसी में गिना जाता है. इसकी कीमत करीब 110 रुपये से ज्यादा है. स्विट्जरलैंड की मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता इसकी वजह है. केमैन आइलैंड्स डॉलर टैक्स हेवन के रूप में मशहूर देश की मुद्रा है और यह भी अमेरिकी डॉलर से ज्यादा मजबूत है. यूरो भले ही डॉलर जितना ताकतवर दिखता हो, लेकिन इसकी एक यूनिट की कीमत भी डॉलर से ज्यादा रहती है और यह दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली मुद्रा है.

वैल्यू और ताकत में फर्क 

यह समझना जरूरी है कि करेंसी की ज्यादा कीमत का मतलब हमेशा मजबूत अर्थव्यवस्था नहीं होता. अमेरिकी डॉलर आज भी इंटरनेशनल ट्रेड, रिजर्व करेंसी और निवेश के मामले में सबसे आगे है. वहीं ऊंची वैल्यू वाली करेंसी अक्सर सीमित सप्लाई और खास नीतियों की वजह से मजबूत दिखती हैं.

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