भारत की तरह रूस में प्रधानमंत्री के पास थी ज्यादा पावर, फिर पुतिन ने कर दिया ये काम
Russia President Vladimir Putin: पुतिन इस वक्त रूस के सबसे ताकतवर नेता हैं और रूस दुनिया के शक्तिशाली देश में से एक है. लेकिन क्या आपको पता है कि कभी रूस में भी प्रधानमंत्री के पास ज्यादा शक्ति थी.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन इस वक्त सुर्खियों में बने हुए हैं. रूस इस वक्त सुपरपावर बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है. रूस इस वक्त अमेरिका के बाद एक दिन में सबसे ज्यादा तेल उत्पादक देश है. डिफेंस सेक्टर में भी रूस अमेरिका को कड़ी टक्कर दे रहा है. दुनिया में अमेरिका के बाद रूस की सेना दूसरी सबसे बड़ी सेना है. परमाणु हथियारों के मामले में भी रूस, अमेरिका से आगे है. रूस करीब 30 साल पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बना था. रूस के पास वीटो पावर भी है. क्या आपको पता है कि भारत की तरह रूस में भी पहले प्रधानमंत्री के पास ज्यादा पावर थी, लेकिन फिर पुतिन ने कुछ ऐसा किया कि अब राष्ट्रपति के पास ज्यादा पावर है.
पिछले 25 साल से रूस के सबसे ताकतवर नेता
पुतिन को सत्ता में रहते हुए करीब 25 साल का समय बीत चुका है. 31 दिसंबर 1999 को पुतिन रूस के राष्ट्रपति बने थे, तब से दुनिया के तमाम मुल्कों में न जानें कितनी सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन पुतिन को कोई राष्ट्रपति पद से टस से मस नहीं कर सका. वे पिछले 25 साल से रूस के सबसे ताकतवर नेता बने हुए हैं. पुतिन के राष्ट्रपति बनने से पहले बोरिस येल्तसिन इस पद पर थे. दरअसल पुतिन को सत्ता में बने रहने की आदत हो गई है. उनको जब भी किसी ने सत्ता से हटाने की कोशिश की तो वे और मजबूत होकर उभरे हैं.
पुतिन ने बदल दिया संविधान
1999 में जब येल्तसिन ने इस्तीफा दिया तो पुतिन रूस के राष्ट्रपति बने. फिर साल 2004 में दूसरी बार वह इस कुर्सी पर काबिज हुए. अब रूस में ऐसा संविधान है कि कोई राष्ट्रपति लगातार तीन बार तक इस पद पर नहीं बैठ सकता है. इसीलिए 2008 से 2012 तक पुतिन को प्रधानमंत्री बनना पड़ा. जब पुतिन प्रधानमंत्री की कुर्सी पर थे तब राष्ट्रपति के पद पर दिमित्री मेदेदेव थे. लेकिन रूस में प्रधानमंत्री नहीं राष्ट्रपति के पास ज्यादा पावर है. 2012 में जब पुतिन फिर से राष्ट्रपति बने तो 2018 में भी जनता ने उनको रूस का राष्ट्रपति चुना. इस दौरान पुतिन मे रूस के संविधान में संशोधन किया. जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति की ताकत बढ़ाते हुए 3 जुलाई 2020 को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया.
2036 तक रह सकते हैं राष्ट्रपति?
इस वजह से उनको छह साल के लिए दो कार्यकाल तक सत्ता में रहने की अनुमति मिली. इसीलिए 7 मई 2024 को पुतिन पांचवीं बार रूस के राष्ट्रपति बने. अब वे 2036 तक राष्ट्रपति पद की दौड़ में बने रह सकते हैं और देश के सबसे ताकतवर नेता भी हैं.
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Source: IOCL


























