World Weakest Currency: डॉलर के मुकाबले भारत के रुपये से भी खराब है इन देशों की करेंसी की हालत, जानें सबसे कमजोर कौन?
World Weakest Currency: बीते कुछ समय में भारतीय करेंसी डॉलर के मुकाबले काफी ज्यादा कमजोर हो चुकी है. इसी बीच आइए जानते हैं दुनिया की सबसे कमजोर करेंसी के बारे में.

World Weakest Currency: भारतीय रुपया यूएस डॉलर के मुकाबले ₹90.95 के निचले स्तर पर पहुंच चुका है. हालांकि यह भारत के लिए काफी बड़ी गिरावट है लेकिन यह दुनिया की सबसे कमजोर करेंसी में से एक होने से काफी दूर है. कई देशों में एक यूनाइटेड स्टेट्स डॉलर हजारों के बराबर होता है. आइए जानते हैं कि दुनिया में किस देश की करेंसी सबसे कमजोर है और इसकी तुलना में भारत कहां खड़ा है.
दुनिया की सबसे कमजोर करेंसी
अभी दुनिया भर में सबसे कमजोर करेंसी लेबनानी पाउंड है. लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता और गंभीर बैंकिंग संकट की वजह से एक यूएस डॉलर की कीमत लगभग 89,500 लेबनानी पाउंड है. पिछले कुछ सालों में लेबनान की आर्थिक गिरावट ने उसके फाइनेंशियल सिस्टम पर लोगों का भरोसा खत्म कर दिया है.
इसके ठीक पीछे ईरानी रियाल है. यह ऑफिशियल रेट पर लगभग 42,100 रियाल प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा है. दशकों से चले आ रहे इंटरनेशनल बैन, ज्यादा महंगाई और दुनिया भर में फाइनेंशियल एक्सेस की कमी की वजह से ईरान की करेंसी काफी कमजोर हो चुकी है.
रुपये के मुकाबले कमजोर एशियाई करेंसी
एशिया में कई मुद्राओं की कीमत भारतीय रुपये के मुकाबले प्रति डॉलर में काफी कम है. वियतनामी डोंग लगभग 26000 डोंग प्रति डॉलर पर ट्रेड करता है. दिलचस्प बात यह है कि वियतनाम जानबूझकर अपनी करेंसी को कम कीमत पर रखता है ताकि ग्लोबल मार्केट में एक्सपोर्ट ज्यादा कॉम्पिटेटिव हो सके. इसी के साथ लाओशियन किप भी लगभग 21000 प्रति डॉलर पर है. इतना ही नहीं बल्कि इंडोनेशिया रुपया भी लगभग 16000 प्रति डॉलर पर ट्रेड करता है.
अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिकी करेंसी की मुश्किलें
अफ्रीका में सिएरा लियोनियन लियोन लगभग 22500 प्रति डॉलर पर ट्रेड करता है. इसी के साथ गिनी फ्रैंक लगभग 8000 प्रति डॉलर पर है. राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और गरीबी ने इन अर्थव्यवस्थाओं पर काफी दबाव डाला है. साउथ अमेरिका में पैराग्वे गुआरानी 7300 प्रति डॉलर से ऊपर ट्रेड कर रहा है.
भारतीय रुपया कहां खड़ा है?
हालांकि भारतीय रुपया कमजोर होकर 90.95 प्रति डॉलर पर आ चुका है लेकिन इसकी स्थिति लेबनान या फिर ईरान जैसी संकटग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं के बराबर बिल्कुल नहीं है. भारत में मजबूत फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और स्थिर इकोनॉमिक ग्रोथ बनी हुई है. हालिया डेप्रिसिएशन की मुख्य वजह क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमत, ग्लोबल डॉलर की मजबूती और विदेशी इन्वेस्टर का आउटफ्लो है ना कि सिस्टमिक कोलैप्स.
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Source: IOCL


























