DMK Congress Alliance: क्या राजनीतिक गठबंधन तोड़ने के भी होते हैं नियम, क्या कांग्रेस की कंप्लेंट कर सकती है DMK?
DMK Congress Alliance: तमिलनाडु में कांग्रेस और डीएमके के बीच गठबंधन टूट चुका है. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या डीएमके कांग्रेस के खिलाफ कोई कदम उठा सकती है.

- कांग्रेस ने विजय और टीवीके का समर्थन किया, डीएमके ने तोड़ा गठबंधन।
- गठबंधन टूटने पर भारत में कानूनी नियम स्पष्ट नहीं हैं।
- राजनीतिक दल बिना अनुमति के गठबंधन छोड़ सकते हैं।
- यह दल-बदल विरोधी कानून के तहत नहीं आता।
DMK Congress Alliance: तमिलनाडु में इंडियन नेशनल कांग्रेस द्वारा अधिक तौर पर अभिनेता विजय और उनकी पार्टी टीवीके का समर्थन करने के बाद विपक्षी खेमे में एक बड़ा राजनीतिक टकराव पैदा हो गया है. इस कदम से डीएमके की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है. डीएमके ने कांग्रेस पर विश्वासघात का आरोप लगाया है और गठबंधन को प्रभावी रूप से समाप्त करने की घोषणा कर दी है. इस विवाद ने अब एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक सवाल खड़ा कर दिया है. क्या भारत में राजनीतिक गठबंधनों के टूटने को नियंत्रित करने वाले कोई कानूनी नियम हैं? साथ ही क्या कोई एक पार्टी गठबंधन छोड़ने के लिए दूसरी पार्टी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कर सकती है? आइए जानते हैं.
राजनीतिक गठबंधन को लेकर कानून
भारत में राजनीतिक गठबंधन किसी खास संवैधानिक प्रावधान या फिर वैधानिक कानून द्वारा शासित नहीं होते. व्यावसायिक समझौते या फिर कानूनी अनुबंधों के उलट चुनावी गठबंधन को विचारधारा, रणनीति या फिर चुनावी गणनाओं पर आधारित अपनी मर्जी से की गई राजनीतिक व्यवस्था माना जाता है. इसका मतलब है की पार्टियां आमतौर पर गठबंधन बनाने और उनमें संशोधन करने के लिए स्वतंत्र होती हैं.
गठबंधन से बाहर निकालने के लिए अनुमति
राजनीतिक दलों को गठबंधन छोड़ने के लिए भारत के चुनाव आयोग, सांसद, अदालत या फिर किसी भी संवैधानिक प्राधिकरण से अनुमति लेने की कोई जरूरत नहीं होती. चाहे चुनाव से पहले हो या फिर चुनाव के बाद पार्टियां राजनीतिक साझेदारियों को जारी रखने या फिर समाप्त करने का फैसला खुद कर सकती है.
ये भी पढ़ें: आर्य से कितने अलग थे द्रविड़, दक्षिण भारत की राजनीति में क्यों है ये जरूरी?
दल बदल विरोधी कानून यहां क्यों नहीं लागू होता?
काफी लोग गठबंधन टूटने को दल बदल विरोधी कानून के साथ भ्रमित करते हैं लेकिन ये दोनों पूरी तरह से अलग हैं. दल बदल विरोधी कानून उन व्यक्तिगत निर्वाचित प्रतिनिधियों पर लागू होता है जो चुने जाने के बाद अपनी पार्टी बदलते हैं. इसे विधायकों को राजनीतिक लाभ के लिए दल बदल करने से रोकने के लिए बनाया गया है. हालांकि यह कानून पूरे राजनीतिक दल पर लागू नहीं होता.
क्या डीएमके कांग्रेस के खिलाफ शिकायत दर्ज कर सकती है?
कानूनी तौर पर इसका जवाब है नहीं. डीएमके सिर्फ इस आधार पर अदालत में कोई भी मुकदमा नहीं दर्ज कर सकती कि कांग्रेस ने किसी अन्य राजनीतिक दल का समर्थन करने का फैसला लिया है. क्योंकि गठबंधन लागू करने योग्य कानूनी अनुबंधनों के बजाय सुरक्षित राजनीतिक समझ होते है इस वजह से उन्हें तोड़ना किसी संवैधानिक या फिर चुनावी उल्लंघन की श्रेणी में नहीं आता.
ये भी पढ़ें: कब तक चलेगा तमिलनाडु का सियासी सस्पेंस, नई सरकार के लिए कितने दिन इंतजार कर सकते हैं राज्यपाल?

























