TVK के 108 विधायकों ने दे दिया इस्तीफा तो क्या उन्हें मिलेगी पेंशन, जानें क्या हैं नियम?
तमिलनाडु की सत्ता के गलियारों में हलचल तेज है. अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने DMK और AIADMK की साठगांठ के खिलाफ बगावत कर दी है. आइए जानें कि क्या इस्तीफे के बाद विधायकों को पेंशन मिलती है.

- संविधान के अनुसार, शपथ के बिना विधायक की शक्तियों का उपयोग संभव नहीं.
तमिलनाडु में चुनाव परिणामों के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया अब एक नाटकीय मोड़ पर आ गई है. अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी, तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके), को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक तनाव चरम पर है. टीवीके ने गुरुवार शाम को एक कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि डीएमके या एआईएडीएमके में से कोई भी सत्ता पर काबिज होने की कोशिश करता है, तो टीवीके के सभी नवनिर्वाचित विधायक सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा सौंप देंगे.
डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीक्रेट डील का शक
पार्टी के भीतर यह कड़ा फैसला उन खबरों के बाद आया है, जिसमें डीएमके और एआईएडीएमके के वरिष्ठ नेताओं के बीच गुप्त बैठकें होने की बात सामने आई थी. विजय की पार्टी का सीधा आरोप है कि ये दोनों पारंपरिक द्रविड़ दल एक-दूसरे के धुर विरोधी होने के बावजूद टीवीके को सत्ता से बाहर रखने के लिए हाथ मिला रहे हैं. टीवीके समर्थकों का मानना है कि उनकी पार्टी को जनता का सबसे बड़ा जनादेश मिला है, फिर भी उन्हें दरकिनार कर लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.
बिना शपथ और कार्यकाल के क्या मिलेगी पेंशन?
विजय की पार्टी के विधायकों के लिए यह फैसला आर्थिक रूप से भी जोखिम भरा है. नियमों के अनुसार, यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि सदन की सदस्यता की शपथ लिए बिना इस्तीफा देता है, तो वह पेंशन के लाभ से वंचित हो जाता है. भारत के अधिकांश राज्यों में पेंशन के लिए कम से कम एक पूर्ण कार्यकाल या एक निश्चित अवधि तक सदस्य बने रहना अनिवार्य है. टीवीके के विधायकों ने यदि बिना औपचारिक कार्यवाही का हिस्सा बने इस्तीफा दिया, तो वे भविष्य में मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाओं और पेंशन के अधिकार खो देंगे.
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सदन की सदस्यता और शपथ का संवैधानिक महत्व
संविधान के तहत, निर्वाचित होने मात्र से कोई व्यक्ति पूरी तरह विधायक की शक्तियों का उपयोग नहीं कर सकता है. जब तक सदस्य सदन में शपथ ग्रहण नहीं कर लेते, वे विधायी कार्यों में भाग लेने के लिए अधिकृत नहीं होते हैं. टीवीके का यह दांव इसी बिंदु पर टिका है; वे सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही इस्तीफा देकर अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं. असम हाई कोर्ट के पुराने फैसलों और विभिन्न राज्यों के नियमों का हवाला दें तो यह साफ है कि बिना सेवा काल पूरा किए इस्तीफा देने वालों को कोई पेंशन नहीं मिलती है.
जनता के जनादेश का अपमान और साठगांठ का आरोप
टीवीके का मुख्य तर्क यह है कि डीएमके और एआईएडीएमके ने जनता के फैसले को नकार दिया है. विजय के नेतृत्व में पार्टी ने जिस तरह से वोट शेयर हासिल किया है, उसके बाद वे खुद को सरकार बनाने का स्वाभाविक दावेदार मान रहे हैं. पार्टी का कहना है कि दो पुरानी पार्टियां सिर्फ अपनी सत्ता बचाने के लिए एक अपवित्र गठबंधन की ओर बढ़ रही हैं. तमिलनाडु की जनता अब इस पूरे घटनाक्रम को बड़े गौर से देख रही है कि क्या अभिनेता विजय का यह साहसी कदम राज्य की राजनीति की दिशा बदल पाएगा.
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