History Of Makeup: अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने महिलाओं और विवाह समारोहों पर नए कड़े फरमान जारी करके एक बार फिर दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबानी नियमों के तहत शादियों में दुल्हन के मेकअप करने, परफ्यूम लगाने जैसी कई पारंपरिक तैयारियों पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है. एक तरफ जहां अफगानिस्तान में खूबसूरती और सजने-धजने की आजादी पर रोक लगाई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ मानव सभ्यता में सौंदर्य प्रसाधनों का इतिहास बेहद समृद्ध और प्राचीन रहा है. चलिए इसी क्रम में मेकअप का इतिहास समझ लेते हैं. 

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तालिबान के नए फरमान और शादियों में पाबंदी

अफगानिस्तान की वर्तमान तालिबान सरकार ने हाल ही में विवाह आयोजनों के लिए नए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसने अफगानी महिलाओं की स्वतंत्रता को और अधिक सीमित कर दिया है. अफगानी मीडिया के अनुसार अब शादी के दिन दुल्हनों के तैयार होने और सौंदर्य प्रसाधनों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक रहेगी. शादी की रस्मों के दौरान दुल्हन न तो चेहरा चमका सकती है और न ही मेहंदी, सेंट या आइब्रो शेपिंग का इस्तेमाल कर सकती है. इस नए आदेश ने वहां की महिलाओं की सुंदरता और सांस्कृतिक रस्मों के अधिकारों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है.

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मेकअप का प्राचीन इतिहास

मेकअप की नींव लगभग 4000 ईसा पूर्व यानी आज से करीब 6000 साल पहले प्राचीन मिस्र में पड़ी थी. उस दौर में रानियां और आम लोग अपनी खूबसूरती को निखारने के लिए प्राकृतिक लेप, मिट्टी और जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते थे. मिस्र में पुरुष और महिलाएं दोनों ही आंखों को आकर्षक बनाने और धूप तथा त्वचा के संक्रमण से बचाने के लिए कोहल (काजल का शुरुआती रूप) लगाते थे. प्राचीन काल में मेकअप केवल सजने का साधन नहीं था, बल्कि यह शरीर की सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और अभिनय कला का एक अहम हिस्सा माना जाता था.

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यूरोप में पाबंदी और क्वीन एलिजाबेथ का दौर

इतिहास में मेकअप पर बैन लगने का यह कोई पहला मामला नहीं है; मध्यकाल के दौरान यूरोप में भी सामाजिक और धार्मिक कारणों से मेकअप पर रोक लगी थी. उस समय सौंदर्य प्रसाधनों को अनैतिक माना जाने लगा था. हालांकि, 16वीं शताब्दी में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने अपने चेहरे के दाग-धब्बों को छिपाने के लिए सफेद लेप का उपयोग किया, जिससे मेकअप का चलन फिर से लौट आया. इसके बाद हॉलीवुड सिनेमा की शुरुआती अभिनेत्रियों ने गोरी रंगत के साथ लाल लिपस्टिक को फैशन का नया ट्रेंड बनाकर इसे पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया.

लिपस्टिक और नेल आर्ट की शुरुआत

लिपस्टिक और नेल पेंट का इतिहास भी बहुत दिलचस्प रहा है, जिसकी शुरुआत एशियाई और प्राचीन सुमेरियन सभ्यताओं में हुई थी. प्राचीन चीन और जापान में महिलाएं अपने नाखूनों को सुंदर रंग देने के लिए प्राकृतिक फूलों और पौधों के रंगों का उपयोग करती थीं, जो आज की नेल पॉलिश का शुरुआती रूप था. दूसरी तरफ, सुमेरियन सभ्यता के लोगों ने होंठों को लाल करने के लिए बीवैक्स, लाल मिट्टी, मेहंदी और प्राकृतिक कीड़ों के रस से लिपस्टिक बनाई. यही प्राकृतिक लाली आगे चलकर आधुनिक लिपस्टिक में तब्दील हुई, जिसे आज केमिकल्स और विभिन्न शेड्स में बनाया जाता है.

20वीं सदी का आधुनिक बदलाव और ऑर्गेनिक ट्रेंड

बीसवीं सदी की शुरुआत के साथ ही मेकअप का व्यवसायीकरण हुआ और वैश्विक स्तर पर बड़ी-बड़ी सौंदर्य प्रसाधन कंपनियां स्थापित हुईं. इस दौर में फाउंडेशन, आईलाइनर, मस्कारा, ब्लश और हाईलाइटर जैसे आधुनिक प्रोडक्ट्स बाजार में उपलब्ध होने लगे. आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और फैशन इंडस्ट्री के प्रभाव से मेकअप सिर्फ सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति का जरिया बन चुका है. वर्तमान समय में केमिकल फ्री, ऑर्गेनिक और स्किन-फ्रेंडली मेकअप प्रोडक्ट्स की मांग दुनियाभर के बाजारों में बहुत तेजी से बढ़ रही है.

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