Taiwan China US Conflict : ताइवान आज दुनिया की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक पहेलियों में से एक बन चुका है. यह एक छोटा सा द्वीप है, लेकिन इसे लेकर दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें अमेरिका और चीन आमने-सामने खड़ी दिखाई देती हैं. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को अलग और लोकतांत्रिक सरकार वाला देश मानता है. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका खुलकर ताइवान को देश नहीं कहता, लेकिन उसकी सुरक्षा और हथियारों की मदद करता है. यही वजह है कि ताइवान को लेकर दोनों के बीच लगातार तनाव बना रहता है.

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पिछले कुछ दिनों में यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते से बातचीत करने के संकेत दिए. चीन ने इसे गंभीर मामला बताते हुए अमेरिका को चेतावनी दी. दरअसल ताइवान सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह एशिया की सुरक्षा, दुनिया की अर्थव्यवस्था और माइक्रोचिप इंडस्ट्री का भी बड़ा केंद्र है. ऐसे में आइए जानते हैं कि ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच मतभेद क्यों हैं और इससे दोनों देशों को क्या फायदा होता है.

ताइवान है क्या?

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ताइवान पूर्वी एशिया में स्थित एक द्वीप है, जिसकी अपनी सरकार, सेना, चुनाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था है. वहां के लोग अपने राष्ट्रपति और संसद का चुनाव खुद करते हैं. लेकिन चीन ताइवान को अलग देश नहीं मानता. चीन का कहना है कि ताइवान उसका हिस्सा है और फ्यूचर में उसे मुख्य भूमि चीन में मिलाया जाएगा. वहीं दूसरी तरफ ताइवान की सरकार खुद को स्वतंत्र मानती है. हालांकि दुनिया के ज्यादातर देशों ने आधिकारिक रूप से ताइवान को अलग देश की मान्यता नहीं दी है, क्योंकि वे चीन के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहते हैं. 

1979 में ऐसा क्या हुआ था?

1979 वह साल था जब अमेरिका ने आधिकारिक रूप से चीन को मान्यता दी और ताइवान के साथ औपचारिक रिश्ते खत्म कर दिए. उस समय अमेरिका ने वन चाइना पॉलिसी को स्वीकार किया. इसका मतलब यह था कि अमेरिका मानता है कि चीन सिर्फ एक है और बीजिंग उसकी सरकार है, लेकिन अमेरिका ने पूरी तरह ताइवान का साथ नहीं छोड़ा. उसी साल अमेरिका ने ताइवान रिलेशन एक्ट बनाया, जिसके तहत उसने ताइवान को सुरक्षा और हथियारों की मदद देना जारी रखा. तभी से अमेरिका एक संतुलन बनाकर चल रहा है. वह चीन से भी रिश्ते रखता है और ताइवान को भी सपोर्ट करता है.

ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच मतभेद क्यों हैं

ताइवान को लेकर सबसे बड़ा विवाद उसकी संप्रभुता यानी मालिकाना हक को लेकर है. चीन का कहना है कि ताइवान उसका हिस्सा है और अगर जरूरत पड़ी तो वह बल प्रयोग करके भी उसे अपने साथ मिला सकता है. चीन इसे अपना विद्रोही प्रांत मानता है. अमेरिका आधिकारिक रूप से ताइवान को स्वतंत्र देश नहीं कहता, लेकिन वह चाहता है कि चीन ताइवान पर जबरदस्ती कब्जा न करे. अमेरिका ताइवान को हथियार देता है और उसकी रक्षा क्षमता मजबूत करने में मदद करता है. यही वजह है कि ताइवान का मुद्दा अमेरिका और चीन के बीच सबसे बड़ा विवाद बन गया है.

चीन को ताइवान से क्या फायदा होगा?

अगर चीन ताइवान पर कंट्रोल हासिल कर लेता है, तो उसे कई बड़े फायदे मिल सकते हैं.  ताइवान चीन के बेहद करीब स्थित है. उस पर कंट्रोल मिलने से चीन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी नौसैनिक ताकत काफी बढ़ा सकता है. वहीं ताइवान पर कब्जा होने से चीन जापान, फिलीपींस और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर दबाव बढ़ा सकता है. इसके अलावा चीनी राष्ट्रपति ताइवान को चीन में मिलाने को बड़ा राजनीतिक लक्ष्य मानते हैं. इससे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की ताकत और छवि मजबूत होगी. 

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अमेरिका को ताइवान से क्या फायदा है?

अमेरिका भी ताइवान को बेहद रणनीतिक रूप से अहम मानता है. अमेरिका नहीं चाहता कि चीन एशिया में बहुत ज्यादा ताकतवर हो जाए. ताइवान अमेरिका के लिए चीन को रोकने की रणनीति का अहम हिस्सा है. अगर ताइवान चीन के कंट्रोल में चला गया तो जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. ताइवान दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर यानी माइक्रोचिप बनाने वाली ताकतों में से एक है. यहां की कंपनियां दुनिया के सबसे एडवांस्ड चिप्स बनाती हैं, जिनका इस्तेमाल मोबाइल, लैपटॉप, कार, AI और हथियारों तक में होता है.अमेरिका नहीं चाहता कि इस इंडस्ट्री पर चीन का कंट्रोल बढ़े.

ताइवान दुनिया के लिए इतना जरूरी क्यों है?

आज दुनिया की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री काफी हद तक ताइवान पर निर्भर है. ताइवान की कंपनियां दुनिया भर की बड़ी टेक कंपनियों के लिए चिप्स बनाती हैं. अगर चीन और ताइवान के बीच युद्ध होता है तो पूरी दुनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है. मोबाइल, कंप्यूटर, कार और इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसलिए ताइवान का मुद्दा सिर्फ एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है.

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