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रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को क्या सच में नहीं बदल सकता चुनाव आयोग, मीनाक्षी नटराजन के मामले में कहां फंसा पेंच?

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा रद्द किए जाने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगी थी. लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया है.

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  • चुनाव आयोग भी RO के नामांकन रद्द फैसले को सामान्यतः नहीं बदलता.

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद यह सवाल चर्चा में है कि क्या रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के फैसले को चुनाव आयोग भी नहीं बदल सकता. सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने के बाद इस मुद्दे पर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई है. दरअसल, मामला चुनावी कानून, चुनाव आयोग की शक्तियों और न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाओं से जुड़ा हुआ है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला कितना अंतिम होता है और चुनाव आयोग की भूमिका कहां तक सीमित रहती है. 

क्या था मीनाक्षी नटराजन का मामला?

मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हो रहे थे. कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया था. लेकिन जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया. इसके बाद कांग्रेस ने इस फैसले को गलत बताते हुए चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट दोनों का दरवाजा खटखटाया, क्योंकि कांग्रेस का कहना था कि नामांकन बिना पर्याप्त कानूनी आधार और राजनीतिक कारणों से रद्द हुआ.

इस केस पर आज सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद अदालत आमतौर पर उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है. अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान और चुनावी कानूनों के तहत चुनाव के बीच में न्यायिक दखल की सीमाएं तय हैं. कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी उम्मीदवार को चुनाव प्रक्रिया के दौरान आपत्ति है, तो उसका समाधान आमतौर पर चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव याचिका के जरिए किया जाता है.

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रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका क्यों अहम है?

रिटर्निंग ऑफिसर नामांकन पत्रों की जांच करता है और तय करता है कि उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए पात्र है या नहीं. नामांकन स्वीकार करना या खारिज करना उसकी वैधानिक जिम्मेदारी होती है. इसी वजह से नामांकन संबंधी फैसले काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

क्या चुनाव आयोग RO का फैसला बदल सकता है?

यहीं सबसे बड़ा पेंच है. चुनाव आयोग के पास चुनावों की निगरानी और नियंत्रण की संवैधानिक शक्ति जरूर है, लेकिन नामांकन की जांच और उस पर फैसला लेने का अधिकार कानून ने सीधे रिटर्निंग ऑफिसर को दिया है. इसी कारण चुनाव आयोग सामान्य परिस्थितियों में रिटर्निंग ऑफिसर के नामांकन संबंधी निर्णय को अपीलीय अदालत की तरह बदल नहीं सकता. यही वजह है कि कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग से गुहार लगाने के बावजूद नामांकन रद्द होने का फैसला बरकरार रहा.

आम धारणा है कि चुनाव आयोग हर चुनावी फैसले को बदल सकता है, लेकिन वास्तविकता थोड़ी अलग है. रिटर्निंग ऑफिसर जब नामांकन की जांच करके फैसला देता है, तो चुनाव आयोग उसके ऊपर अपीलीय प्राधिकरण की तरह काम नहीं करता. यानी आयोग सामान्य परिस्थितियों में RO के फैसले को सीधे पलट नहीं सकता है. यही वजह है कि मीनाक्षी नटराजन के मामले में चुनाव आयोग के पास हस्तक्षेप की सीमित गुंजाइश थी. कांग्रेस चाहती थी कि आयोग नामांकन रद्द करने के फैसले को बदले, लेकिन कानूनी ढांचा इसकी अनुमति स्पष्ट रूप से नहीं देता.

फिर उम्मीदवार के पास क्या विकल्प बचता है?

यदि किसी उम्मीदवार को लगता है कि उसका नामांकन गलत तरीके से खारिज किया गया है, तो वह चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव याचिका दाखिल कर सकता है. इसके जरिए अदालत पूरे मामले की जांच कर सकती है और जरूरत पड़ने पर और कानूनी ढांचे अनुसार ही चुनाव परिणाम को भी प्रभावित करने वाला फैसला दे सकती है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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