Stubble Burning: पूरे उत्तर भारत में जैसे ही खरीफ की कटाई का मौसम शुरू होता है पराली जलाने की घटना फिर से सामने आने लगती हैं. किसान अक्सर अगली फसल के लिए अपने खेतों को जल्दी से खाली करने के लिए धान के अवशेषों को जला देते हैं. लेकिन यह प्रथा सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण और खासतौर से दिल्ली एनसीआर में धुंध को बढ़ाने में बड़ा योगदान देती है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सैटेलाइट निगरानी के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक 15 सितंबर को मौसमी ट्रैकिंग शुरू होने के बाद से आग की घटना दर्ज की गई है. हालांकि पिछले सालों की तुलना में शुरुआती सीजन के मामलों में गिरावट आई है लेकिन कई क्षेत्रों में पराली में आग लगने की घटनाएं सामने आ रही हैं. 

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पंजाब में प्रारंभिक आग की घटनाओं की रिपोर्ट 

पंजाब में 15 से 20 सितंबर तक सीजन के पहले 6 दिनों के दौरान पराली जलाने के 15 मामले दर्ज किए गए हैं. 1 दिन में दर्ज की गई घटनाओं की सबसे ज्यादा संख्या 8 थी. पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक अमृतसर राज्य में सबसे ज्यादा घटनाओं वाले जिले के रूप में उभरा है. फिरोजपुर, तरनतारन, होशियारपुर और शहीद भगत सिंह नगर में भी आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं. शुरुआती आंकड़े सीजन की अपेक्षाकृत सीमित शुरुआत का संकेत देते हैं. हालांकि राज्य भर मैं धान की कटाई बढ़ने के साथ घटनाओं की संख्या बदल सकती है.

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हरियाणा और उत्तर प्रदेश में स्थिति 

बताया जा रहा है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं फिलहाल कुछ हद तक प्रशासनिक निगरानी और निवारक उपायों के कारण कंट्रोल में हैं. उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद जैसे जिलों में पराली जलाने की घटनाओं में भारी गिरावट देखी गई है. कथित तौर पर मामले शून्य स्तर तक पहुंच गए हैं. जैविक खाद के इस्तेमाल सहित वैकल्पिक फसल अवशेष प्रबंधन विधियों को अपनाने से खेत की आग को कम करने के प्रयासों में योगदान मिला है. हालांकि अधिकारी हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों और ग्रामीण क्षेत्रों की निगरानी जारी रखते हैं. इन क्षेत्रों में कटाई की गतिविधि तेज होने से पराली जलाने का खतरा बढ़ सकता है. 

जुर्माना और लाल एंट्रीज प्रस्तावित 

सर्दी के मौसम में प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने पराली जलाने के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं. प्रस्तावित केंद्रीय नियमों के तहत किसानों को उनकी कृषि भूमि के आकार के आधार पर ₹5000 से ₹30000 तक पर्यावरण मुआवजा का सामना करना पड़ सकता है. 

15 महीने के लिए भूमि रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी दर्ज की जा सकती है. इस तरह की एंट्री किसानों की कर्ज और कुछ सरकारी लाभों तक पहुंच को प्रभावित कर सकती है. पंजाब में कथित तौर पर कुछ शुरुआती मामलों में जुर्माना लगाया जा चुका है.

जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई 

राज्य सरकार पराली की आग को रोकने के लिए क्षेत्र स्तरीय निगरानी को बढ़ा रही हैं. हरियाणा सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन की निगरानी और किसानों को मौजूद विकल्पों के बारे में सूचित करने के लिए 8200 से ज्यादा अधिकारियों और फील्ड टीमों को तैनात किया है. 

मोहाली जैसे जिलों में अधिकारियों ने निवारक उपाय के रूप में रात में कंबाइन कटाई पर प्रतिबंध लगा दिया है. प्रतिबंध का उद्देश्य व्यक्तियों को बिना पहचाने अंधेरे में पराली जलाने से रोकना है. ऐसे उपायों को जागरूकता अभियानों और मशीनरी तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयासों के साथ लागू किया जा रहा है जो किसानों को बिना आग लगाए फसल अवशेषों का प्रबंधन करने की अनुमति देते हैं.

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भगवंत मान का क्या कहना है? 

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि वह पराली जलाने के लिए किसानों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का समर्थन नहीं करते हैं. इसके बदले उन्होंने केंद्र सरकार से आर्थिक मदद की मांग की है. भगवंत मान ने पराली जलाने से बचने वाले किसानों के लिए प्रति एकड़ ₹3 हजार  की प्रोत्साहन राशि की मांग की है . प्रस्ताव के मुताबिक यह समर्थन किसानों को वित्तीय नुकसान उठाए बिना वैज्ञानिक फसल अवशेष प्रबंधन तरीकों को अपने में मदद करेगा.

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