Strait Of Gibraltar: समुद्र का एक बेहद संकरा सा रास्ता आज वैश्विक राजनीति का बड़ा केंद्र बन चुका है. स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर, जो यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप को अलग करता है, इन दिनों अवैध घुसपैठ की खबरों के कारण चर्चा में है. मोरक्को के रास्ते स्पेन और फिर वहां से पूरे यूरोपीय संघ में शरणार्थियों के प्रवेश को लेकर यूरोपीय देशों में तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है. लोगों के मन में सवाल है कि क्या शरणार्थी 14 किलोमीटर चौड़े इस गहरे समुद्री जलडमरूमध्य को तैरकर पार कर रहे हैं या घुसपैठ का गणित कुछ और है. आइए समझते हैं यह क्या है और यहां से कैसे यूरोप में घुसपैठ होती है.

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यूरोप में बढ़ता अवैध शरणार्थी मुद्दा

यूरोप के कई देशों में शरणार्थियों को पनाह देने की नीति का विरोध तेज हो गया है. यूरोपीय संघ के देशों के बीच सीमाओं पर कोई स्थायी सैन्य जांच नहीं होती, जिससे एक देश में प्रवेश करने वाला व्यक्ति पूरे यूरोप में कहीं भी आ-जा सकता है. राजनीतिक दलों का तर्क है कि यदि स्पेन अपनी सीमाओं पर सख्ती नहीं बरतता है, तो अफ्रीका और एशिया से आने वाले लोग पूरे यूरोप की जनसांख्यिकी और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करेंगे. यही कारण है कि जिब्राल्टर जलडमरूमध्य का यह इलाका अचानक अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गया है. 

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क्या है स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर का भूगोल?

भूगोलिक दृष्टि से देखें तो उत्तर में स्पेन (यूरोप) और दक्षिण में मोरक्को (अफ्रीका) स्थित हैं. इन दोनों के बीच स्थित पानी का संकरा समुद्री रास्ता 'स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर' कहलाता है. नक्शे पर दोनों तटों के बीच की सबसे कम दूरी केवल 14 किलोमीटर दर्ज की गई है. इस आंकड़े को देखकर आम तौर पर यह गलतफहमी हो जाती है कि शरणार्थी अफ्रीका से यूरोप पहुंचने के लिए 14 किलोमीटर का पूरा खुला और तूफानी समुद्र तैरकर पार करते हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग और काफी दिलचस्प है.

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जिब्राल्टर से यूरोप में कैसे होती है घुसपैठ?

अवैध प्रवेश का असली राज इस बात में छिपा है कि अफ्रीका महाद्वीप की मुख्य भूमि पर भी स्पेन का कानूनी नियंत्रण है. स्पेन के दो छोटे शहर- सेउता (Ceuta) और मेलिया (Melilla) भौगोलिक रूप से पूरी तरह अफ्रीका के मोरक्को से घिरे हुए तटवर्ती क्षेत्र हैं. यानी ये दोनों शहर कोई द्वीप नहीं हैं, बल्कि तीन तरफ से मोरक्को की जमीन और एक तरफ से समुद्र से जुड़े हैं. अफ्रीका की धरती पर होने के बावजूद ये दोनों शहर कानूनी और प्रशासनिक रूप से स्पेन के मुख्य भूभाग का हिस्सा माने जाते हैं.

सेउता और मेलिया का सदियों पुराना इतिहास 

इन दोनों शहरों पर स्पेन का अधिकार कोई नया घटनाक्रम नहीं है. आंकड़ों के अनुसार स्पेन ने 1497 में मेलिया पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था, जब आधुनिक मोरक्को एक संगठित राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में भी नहीं था. वहीं सेउता पर 1415 में पुर्तगाल ने कब्जा किया था. जब 1580 से 1640 के बीच स्पेन और पुर्तगाल एक ही शासन के अधीन आए, तब सेउता स्पेन से जुड़ा. 1640 में दोनों देशों के अलग होने पर सेउता के नागरिकों ने स्पेन के साथ रहने का ऐतिहासिक फैसला किया. मोरक्को समय-समय पर इन क्षेत्रों पर दावा करता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार यह स्पेन का हिस्सा हैं.

जमीनी सीमा, बाड़बंदी और घुसपैठ का तरीका

अब सवाल उठता है कि मोरक्को से लोग सेउता में कैसे घुसते हैं? स्पेन ने सेउता और मोरक्को की जमीनी सीमा पर कई मीटर ऊंची, आधुनिक और कटीली तारों की मजबूत बाड़बंदी कर रखी है. इस अभेद्य सुरक्षा को सीधे पार करना लगभग नामुमकिन होता है। हालांकि, यह कटीली बाड़ सीमा से होते हुए समुद्र के पानी में कुछ मीटर अंदर तक ही जाती है. 

कुछ मीटर की तैराकी और सीमा पार

शरणार्थी इसी भौगोलिक सुरक्षा चूक का फायदा उठाते हैं. वे मोरक्को के सीमावर्ती शहर फ्नीदेक से पानी में उतरते हैं और बाड़ के किनारे-किनारे मात्र कुछ सौ मीटर या 1-2 किलोमीटर तैरकर बाड़ को बाईपास कर देते हैं. इस तरह वे पूरा 14 किलोमीटर का जिब्राल्टर जलडमरूमध्य पार किए बिना, अफ्रीका की धरती पर ही मोरक्को से स्पेनिश क्षेत्र सेउता में कदम रख देते हैं और फिर वहां कानूनी प्रक्रिया की मांग करते हैं. हालांकि यह सब जितना आसान दिखता है उतना है नहीं.

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