Spain Train Collision: स्पेन को यूरोप के प्रमुख हाई-स्पीड रेल नेटवर्क वाले देशों में गिना जाता है. यहां आधुनिक ट्रेनें तेज रफ्तार से शहरों को जोड़ती हैं और यात्रियों को कम समय में लंबी दूरी तय करने की सुविधा देती हैं. लेकिन 28 अक्टूबर 2026 को टोलेडो प्रांत के उर्दा के पास दो हाई-स्पीड ट्रेनों की टक्कर ने इस आधुनिक रेल व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे में दो हाई-स्पीड ट्रेनें आपस में टकरा गईं. इस दुर्घटना में कम से कम 68 लोगों की मौत की खबर सामने आई और कई यात्री घायल हुए है. इससे पहले स्पेन में ही जनवरी 2026 में अदामुज के पास भी एक बड़ा रेल हादसा हुआ था, जिसमें 46 लोगों की मौत हुई थी. एक ही साल में दो गंभीर दुर्घटनाओं के बाद स्पेन में रेलवे के सिग्नलिंग और ट्रेन संचालन के तरीकों पर कई सवाल खड़े हुए है. ऐसे में आइए जानते हैं कि स्पेन में ट्रेन कितनी स्पीड से चलती है और वहां का रेल सिस्टम कैसे मैनेज होता है.

करीब 300 किमी/घंटा की चलती हैं ट्रेनें

स्पेन की हाई-स्पीड ट्रेनों की रफ्तार उनके मॉडल, रेलवे लाइन और सुरक्षा प्रणाली पर निर्भर करती है. आमतौर पर वहां हाई-स्पीड सेवाएं करीब 300 किमी/घंटा की रफ्तार से चलती हैं. कुछ आधुनिक ट्रेनें इससे अधिक स्पीड की स्पीड तक चलाने के लिए भी डिजाइन की गई है. स्पेन की सरकारी रेल कंपनी Renfe की S-106 ट्रेन की अधिकतम रफ्तार हाई-स्पीड ट्रैक पर 330 किमी/घंटा तक है. हालांकि  इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रेन हर यात्रा में इसी गति से चलती है. ट्रेन की स्पीड रेलवे लाइन की सीमा, सिग्नल, मौसम और ट्रैक की स्थिति और परिचालन संबंधी निर्देशों के अनुसार तय होती है.

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ऐसे मैनेज होता है  रेल सिस्टम

स्पेन में रेल संचालन के लिए ट्रेन ड्राइवर, रेलवे कंट्रोल सेंटर, सिग्नलिंग और स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणालियां मिलकर काम करती हैं. कंट्रोल सेंटर अलग-अलग ट्रेनों की आवाजाही पर नजर रखता है और ट्रैक पर यातायात को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यूरोप में इस्तेमाल होने वाली ERTMS (European Rail Traffic Management System) व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग देशों के रेलवे नेटवर्क में ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित और एकसमान बनाना है. इसके एक प्रमुख हिस्से ETCS के जरिए ट्रेन की गति और आगे बढ़ने की अनुमति पर नजर रखी जाती है. जरूरत पड़ने पर यह ड्राइवर को चेतावनी देने और आपातकालीन ब्रेक लगाने में भी मदद करती है.

तकनीकी समस्या है वजह

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 अक्टूबर के हादसे की शुरुआती जांच में पता चला है कि एक तकनीकी समस्या के कारण रेल यातायात प्रभावित हुआ था. स्वचालित नियंत्रण प्रणाली में गड़बड़ी के बाद कई ट्रेनों को रोकना पड़ा. इसके बाद एक ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति दिए जाने के फैसले की जांच शुरू हुई, जबकि दूसरी ट्रेन उसी ट्रैक पर रुकी हुई थी.

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