Space Debris: अंतरिक्ष की ऊंचाइयों में इंसानों के कदम जैसे-जैसे बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे वहां कचरे का संकट भी विकराल रूप लेता रहा है. तमाम देशों द्वारा भेजे जाने वाले उपग्रह और रॉकेट अब पृथ्वी की कक्षा को एक कबाड़खाने में तब्दील कर रहे हैं. चिंता की बात यह है कि यह मलबा केवल अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि अब पृथ्वी पर भी गिरने लगा है. हाल के दिनों में पोलिश स्पेस एजेंसी और अमेरिका की स्पेस फोर्स के आंकड़े गवाह रहे हैं कि हर हफ्ते लगभग एक मीट्रिक टन कचरा हमारी धरती की ओर लौट रहा है. तो यह भी जान लीजिए वहां आखिर कितना जंक जमा है.
अंतरिक्ष में कहां से आता है इतना कबाड़?
अंतरिक्ष में फैले इस कबाड़ को वैज्ञानिक भाषा में स्पेस डेब्रिस यानी अंतरिक्ष का मलबा कहा जाता है. इसमें वे सभी मानव निर्मित वस्तुएं शामिल हैं जो पृथ्वी की कक्षा में बिना किसी इस्तेमाल के चक्कर काट रही हैं. इस मलबे के कई जरिए होते हैं. सबसे पहले वे उपग्रह आते हैं जिनकी समयावधि खत्म हो चुकी है. इसके अलावा रॉकेट लॉन्च के बाद अंतरिक्ष में ही छूट जाने वाले बूस्टर और उनके धातु के पुर्जे भी इसी में शामिल हैं. दो उपग्रहों के आपस में टकराने, सैन्यवाद परीक्षणों के विस्फोटों, अंतरिक्ष यात्रियों के छूटे औजारों और रॉकेट ईंधन की बूंदों से भी अरबों सूक्ष्म टुकड़े बन जाते हैं.
किस देश ने फैलाया सबसे ज्यादा कचरा?
अंतरिक्ष को गंदा करने वाले देशों की सूची में रूस पहले पायदान पर खड़ा है. इसके बाद अमेरिका, चीन, फ्रांस और जापान का नाम आता है. रूस के शीर्ष पर होने की मुख्य वजह उसकी दशकों पुरानी अंतरिक्ष रिसर्च और अनगिनत मिशन हैं. इसके अलावा 2021 में रूस द्वारा किया गया एक घातक एंटी-सैटेलाइट (ASAT) मिसाइल टेस्ट भी बड़ी वजह रहा. इस परीक्षण में रूस ने अपनी ही एक पुरानी सैटेलाइट को उड़ा दिया था, जिससे मलबे के हजारों खतरनाक टुकड़े बन गए थे. इस कबाड़ ने अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) और उसमें मौजूद वैज्ञानिकों के जीवन तक को भारी खतरे में डाल दिया था.
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कितना खतरनाक है यह मलबा?
नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के हालिया आंकड़े अंतरिक्ष के इस भयानक सच को उजागर करते हैं. इस समय 10 सेंटीमीटर से बड़ी आकार की लगभग 40,500 से अधिक वस्तुओं पर रडार से सीधी निगरानी रखी जा रही है. ये वस्तुएं पूरे उपग्रहों और रॉकेट के टूटे हिस्सों के रूप में तैर रही हैं. इसके अलावा 1 से 10 सेंटीमीटर आकार के लगभग 12 लाख मध्यम टुकड़े कक्षा में मौजूद हैं. सबसे ज्यादा चिंताजनक आंकड़ा 13 करोड़ से अधिक सूक्ष्म कणों का है, जिन पर नजर रखना वैज्ञानिकों के लिए भी असंभव है. इस वैश्विक आंकड़े में भारत का योगदान सिर्फ 129 ट्रैक किए जाने वाले मलबे के टुकड़ों का है.
अंतरिक्ष से लौटने पर यात्री कचरा कहां फेंकते हैं?
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या स्पेस स्टेशन में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स धरती के लोगों की तरह कचरा सीधे अंतरिक्ष में उछाल देते हैं? जवाब है बिल्कुल नहीं. अंतरिक्ष यात्री अपना कोई भी कचरा खुले अंतरिक्ष में नहीं फेंकते, क्योंकि ऐसा करने से उपग्रहों से टक्कर का खतरा और बढ़ जाएगा. इसके बजाय, वे अपने रोजमर्रा के कचरे, बचे हुए सामान और इस्तेमाल की हुई चीजों को खास तरह के सीलबंद और बदबू-रोधी थैलों में पैक करके रखते हैं. इस पूरे कचरे को स्पेस स्टेशन के अंदर एक तय सुरक्षित डिब्बे में जमा किया जाता है.
वायुमंडल में राख किया जाता है कचरा
जब स्पेस स्टेशन पर रसद पहुंचाने वाले कमर्शियल कार्गो या सप्लाई वाहन (जैसे स्पेसएक्स का ड्रैगन) अपनी वापसी की तैयारी करते हैं, तो सारा सीलबंद कचरा उनमें लाद दिया जाता है. जैसे ही ये कार्गो जहाज पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश करते हैं, अत्यधिक गति और हवा के घर्षण के कारण भयंकर गर्मी से वाहन समेत सारा कचरा हवा में ही जलकर राख हो जाता है. आधुनिक समय में इसके लिए बिशप एयरलॉक जैसी उन्नत तकनीक का भी इस्तेमाल हो रहा है, जिससे कचरे का कंटेनर सुरक्षित रूप से वायुमंडल में भेजकर पूरी तरह नष्ट कर दिया जाता है.
धरती पर मंडराता अंतरिक्ष के कचरे का खतरा
दुनिया भर के देश अंतरिक्ष में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं. हर साल सैकड़ों रॉकेट और उपग्रह छोड़े जा रहे हैं. पोलिश स्पेस एजेंसी के मारियस स्लोनिना के एक चौंकाने वाले खुलासे के अनुसार, हर हफ्ते लगभग एक मीट्रिक टन वजन का अंतरिक्ष कचरा हमारी पृथ्वी पर गिर रहा है. इस खतरे की भयावहता तब खुलकर सामने आई जब इस साल की शुरुआत में केन्या में एक अंतरिक्षयान की धातु की विशालकाय रिंग अचानक जमीन पर आ गिरी. हालांकि अधिकांश मलबा वायुमंडल के घर्षण से जल जाता है, लेकिन कुछ बड़े टुकड़े सीधे जमीन तक पहुंच रहे हैं.
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