Sikkim Tunnel Blast 2026: हाल ही में सिक्किम के नामची जिले में हुए भयानक टनल हादसे ने इस बात को एक बार फिर सामने ला दिया है कि पहाड़ों की चट्टानों के अंदर छिपी मीथेन गैस कितनी खतरनाक साबित हो सकती है. दरअसल, 20 जुलाई 2026 को सिक्किम के समरडुंग इलाके में बन रही एक सुरंग में यह हादसा हुआ. बताया जा रहा है कि सुरंग के अंदर चट्टानों में दबी मीथेन गैस अचानक तेजी से बाहर निकली, जिसके कारण सुरंग मे जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते पूरी सुरंग धुएं और जहरीली गैस से भर गई.
इस पूरी घटना में सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि इस दर्दनाक हादसे में अब तक करीब 21 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई मजदूर अब भी सुरंग के अंदर फंसे हुए बताए जा रहे हैं और बताया जा रहा है कि अभी भी रेस्कयू टिम मजदूरों के रेस्क्यू में लगी हुई है. इसी हादसे के बाद हर किसी के मन में यही सवाल आ रहा है कि आखिर पहाड़ों की चट्टानों में यह जानलेवा गैस बनती कैसे है?
चट्टानों में मीथेन गैस बनने की प्रक्रिया
ऐसे में वैज्ञानिकों के मुताबिक मीथेन गैस सिर्फ कचरे के सड़ने से ही नहीं बनती, बल्कि एक खास तरह की प्रक्रिया से बनता है. यह प्रक्रिया खासतौर पर उन पहाड़ी इलाकों में होती है जहां पेरिडोटाइट और सर्पेंटीनाइट जैसे लोहे से भरपूर खनिज पाए जाते हैं. जब पानी इन खनिजों के संपर्क में आता है, तो एक रासायनिक क्रिया होती है, जिसमें हाइड्रोजन गैस बनती है. और फिर यही हाइड्रोजन आगे चलकर चट्टानों में मौजूद कार्बन से मिलकर मीथेन गैस बना देती है. यह गैस चट्टानों के अंदर मौजूद बेहद बारीक दरारों और छेदों में जमा होती रहती है, और अक्सर इसका पता तब तक नहीं चलता जब तक खुदाई, या विस्फोट न किया जाए. यही वजह है कि इन इलाकों में ऐसी गैस के अचानक रिसने का खतरा हमेशा बना रहता है.
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कितनी जानलेवा साबित हो सकती है यह गैस?
मीथेन गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, यानी इंसान इसे न देख सकता है न सूंघ सकता है. वहीं, अगर बंद सुरंग हो तो इसका खतरा और भी बढ़ जाता है. सिक्किम हादसे में भी यही देखने को मिला, जहां रेस्क्यू टीमों को सुरंग के अंदर घुसने में भारी दिक्कत आई, क्योंकि जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी की वजह से बिना खास उपकरणों के अंदर जा ही नहीं सकते थे. मीथेन गैस बेहद ज्वलनशील होती है, यानी अगर यह किसी बंद जगह में जमा हो जाए और चिंगारी लग जाए तो तुरंत विस्फोट हो सकता है, ठीक वैसे ही जैसे सिक्किम की सुरंग में हुआ. इसके अलावा अगर यह गैस किसी बंद जगह में ज्यादा मात्रा में भर जाए तो वहां ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे दम घुटने और जान जाने का खतरा बढ़ जाता है.
