दुनिया के इतिहास में कई ऐसे युद्ध लड़े गए हैं जो महीनों और सालों तक चले. पहले और दूसरे विश्व युद्ध की तबाही को दुनिया आज तक नहीं भूली है, जिसने सालों तक इंसानी सभ्यता को झकझोर कर रख दिया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतिहास में एक ऐसा युद्ध भी हुआ था, जो दिनों या हफ्तों नहीं, बल्कि चंद मिनटों में ही खत्म हो गया था? जी हां, यह इंसानी इतिहास की सबसे छोटी लड़ाई मानी जाती है, जो मात्र 38 मिनट में अपने अंजाम तक पहुंच गई थी. इतनी छोटी अवधि में लड़े गए इस युद्ध ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करा लिया.

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नए सुल्तान की जिद बनी युद्ध का कारण

सुल्तान हमद की मौत के तुरंत बाद उनके चचेरे भाई खालिद बिन बरघश ने ब्रिटेन की मर्जी के खिलाफ जाकर खुद को ज़ांज़ीबार का नया सुल्तान घोषित कर दिया. ब्रिटिश सरकार इस फैसले से बिल्कुल खुश नहीं थी. अंग्रेजों की एक संधि के अनुसार, जांजीबार का नया सुल्तान केवल ब्रिटिश कौंसल की मंजूरी के बाद ही गद्दी पर बैठ सकता था.

ब्रिटिश अधिकारियों ने खालिद बिन बरघश को तुरंत गद्दी छोड़ने और अपने महल से बाहर आने का आदेश दिया. लेकिन खालिद ने अंग्रेजों के इस अल्टीमेटम को हल्के में ले लिया. उसने गद्दी छोड़ने से साफ मना कर दिया और ब्रिटिश सेना का मुकाबला करने के लिए महल के चारों तरफ अपने करीब 3000 सैनिकों को तैनात कर दिया.

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सिर्फ 38 मिनट का एक्शन और आत्मसमर्पण

ब्रिटिश सेना ने सुल्तान खालिद को अपनी स्थिति सुधारने के लिए 27 अगस्त की सुबह 9 बजे तक का समय दिया था. जब तय समय तक खालिद ने आत्मसमर्पण नहीं किया, तो ठीक 9 बजकर 2 मिनट पर ब्रिटिश नौसेना के युद्धपोतों ने सुल्तान के महल पर भीषण बमबारी शुरू कर दी.

ब्रिटिश जहाजों से दागे जा रहे गोलों ने कुछ ही मिनटों में सुल्तान के महल को मलबे में तब्दील कर दिया. जांजीबार के सैनिकों के पास अंग्रेजों के आधुनिक हथियारों और तोपों का कोई मुकाबला नहीं था. महल की लकड़ी की संरचनाएं बहुत तेजी से आग की लपटों में घिर गईं. सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर, यानी ठीक 38 मिनट के बाद, सुल्तान के सैनिकों ने युद्ध का झंडा झुका दिया और पीछे हट गए.

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महल छोड़कर भागे सुल्तान और भारी नुकसान

मात्र 38 मिनट तक चली इस भारी गोलीबारी में ज़ांज़ीबार की सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा. इस युद्ध में जांजीबार के लगभग 500 सैनिक और नागरिक मारे गए या गंभीर रूप से घायल हो गए. इसके विपरीत, आधुनिक हथियारों से लैस ब्रिटिश सेना का केवल एक सैनिक घायल हुआ था, जिसकी बाद में जान बच गई थी.

जैसे ही सुल्तान खालिद बिन बरघश ने देखा कि ब्रिटिश तोपों के सामने टिकना नामुमकिन है, वह युद्ध के बीच में ही महल के पिछले रास्ते से भाग निकला. खालिद ने भागकर स्थानीय जर्मन दूतावास में शरण ले ली. इस तरह अंग्रेजों ने इस बेहद छोटे युद्ध को जीतकर ज़ांज़ीबार पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया.

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