Shashi Tharoor Profile: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर बेनकाब करने के लिए 7 सर्वदलीय डेलिगेशन गठित किए हैं. इसमें एक डेलिगेशन को कांग्रेस सांसद शशि थरूर लीड करने वाले हैं. भारत सरकार की ओर से बनाए गए ये सभी डेलिगेशन संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों का दौरा करेंगे और आतंकवाद पर भारत के रुख, ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई को वैश्विक मंचों पर रखेंगे. इस दौरान यह डेलिगेशन आतंकवाद पर पाकिस्तान के चेहरे को भी बेनकाब करने का काम करेगा. 

भारत सरकार की ओर से जब से सर्वदलीय डेलिगेशन का ऐलान किया गया है तो शशि थरूर के नाम पर बवाल मचा हुआ है. दरअसल, कांग्रेस का कहना है कि उसने शशि थरूर का नाम डेलिगेशन के लिए नहीं दिया था, बीजेपी ने खुद से थरूर के नाम का चयन किया है. वहीं, शशि थरूर ने सर्वदलीय डेलिगेशन के लिए खुद का नाम का ऐलान होने के बाद कहा है कि वह इसको लेकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं. हालांकि, इसमें कोई दो राय नहीं है कि विदेश में भारत सरकार का रुख रखने के मामले में शशि थरूर सबसे योग्य सांसद हैं. वह न केवल अच्छी अंग्रेजी बोल लेते हैं, बल्कि उनकी कूटनीतिक समझ भी काफी अच्छी है. इतना ही नहीं लंबे समय तक संयुक्त राष्ट्र में काम करने का उनका अनुभव भी है. ऐसे में चलिए जानते हैं शशि थरूर के करियर के बारे में...  

सांसद बनने से पहले संयुक्त राष्ट्र में करते थे नौकरी

शशि थरूर का जन्म लंदन में रहने वाले एक भारतीय प्रवासी परिवार में हुआ था. जन्म के बाद उनका परिवार वापस भारत लौट आया था. स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद थरूर ने 1978 में दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की. 22 साल की उम्र में उन्होंने मैसाचुसेट्स के मेडफोर्ड के टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में फ्लेचर स्कूल ऑफ लॉ एंड डिप्लोमेसी से पीएचडी डिग्री प्राप्त की. उस समय में थरूर फ्लेचर स्कूल से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे. थरूर ने 1978 में ही अपना करियर शुरू कर दिया था. जिनेवा में शरणार्थियों के लिए संयक्त राष्ट्र उच्चायुक्त (UNHCR) में स्टाफ मेंबर के रूप में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. 

संयुक्त राष्ट्र में इन बड़े पदों पर किया काम

संयुक्त राष्ट्र से जुड़ने के बार थरूर ने कई बड़े पदों पर काम किया. संयुक्त राष्ट्र में अपने करीब 30 साल के करियर में उन्होंने एक डिप्लोमेट के रूप में लंबे समय तक काम किया. वह 1981 से 1984 तक सिंगापुर यूएनएचसीआर कार्यालय के प्रमुख रहे. 1998 से 2001 तक जनरल सेक्रेटी कार्यालय में डॉयरेक्टर ऑफ कम्यूनिकेशन एंड स्पेशल प्रोजेक्ट और 2002 से 2007 तक कम्यूनिकेशन एंड पब्लिश इंफॉर्मेशन के अवर महासचिव के रूप में काम किया. 2006 में भारत सरकार ने थरूर को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव पद के लिए भी नामित किया था, सात उम्मीदवारों में वह दूसरे स्थान पर रहे थे. इसमें दक्षिण कोरिया के पूर्व राजनयिक बान की मून ने जीत हासिल की थी. 2009 में थरूर भारत वापस लौटे और भारतीय राजनीति में शामिल हो गए. 

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