कभी कानपुर की सड़कों पर टेंपो के इंजन की आवाज और आज रनवे पर विमान की गूंज. यह कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि उस जिद की मिसाल है जो हालात से हार मानने से इनकार कर देती है. जिस शख्स ने आम आदमी की तरह जिंदगी देखी, वही आज हवाई सफर को आम लोगों के और करीब लाने की तैयारी में है. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर श्रवण कुमार विश्वकर्मा कौन हैं और कैसे उन्होंने ऑटो चलाकर खुद की एयरलाइन शुरू की. 

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कानपुर से उड़ान का सपना

उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मे श्रवण कुमार विश्वकर्मा की जिंदगी साधारण हालातों में शुरू हुई थी. मध्यम वर्गीय परिवार, सीमित संसाधन और जिम्मेदारियों से भरा बचपन था. पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगा और हालात ऐसे बने कि पढ़ाई जल्दी छूट गई, लेकिन यहीं से उनकी असली पाठशाला शुरू हुई- जिंदगी की. कानपुर की गलियों में उन्होंने मेहनत का मतलब समझा और आम आदमी की मुश्किलों को बेहद करीब से देखा.

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टेंपो और ट्रक से कारोबार की नींव

श्रवण कुमार सिर्फ टेंपो में सफर करने वाले नहीं रहे, बल्कि उन्होंने खुद टेंपो चलाया भी है. उनका कहना है कि जो इंसान नीचे से ऊपर आता है, वह साइकिल, बस, ट्रेन, टेंपो सब कुछ देखता है और यही अनुभव उसे जमीन से जोड़े रखता है. धीरे-धीरे उन्होंने बिजनेस की राह पकड़ी और सबसे पहले टीएमटी सरिया का कारोबार शुरू किया, फिर सीमेंट, माइनिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में कदम रखा. ट्रकों का बड़ा बेड़ा खड़ा किया और यहीं से उनकी पहचान एक सफल कारोबारी के तौर पर बनने लगी.

एविएशन की ओर झुकाव कैसे हुआ

करीब तीन से चार साल पहले श्रवण कुमार को लगा कि अब कुछ अलग और बड़ा करने का वक्त आ गया है. उनका मानना था कि एविएशन आने वाले समय की सबसे बड़ी ग्रोथ इंडस्ट्री बनने वाली है. एक यात्रा के दौरान उन्होंने महसूस किया कि मध्यम वर्ग के लिए सस्ती, भरोसेमंद और पारदर्शी एयरलाइन की भारी कमी है. यहीं से शंख एयरलाइंस का विचार जन्मा, जिसका मकसद हवाई सफर को सिर्फ अमीरों की सुविधा न रहने देना था.

शंख एयरलाइंस का नाम और सोच

श्रवण कुमार विश्वकर्मा ने अपनी एयरलाइन का नाम रखा शंख एयरलाइंस. शंख भारतीय संस्कृति में शुभता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. उनका मानना है कि यह एयरलाइन उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलेगी. उन्होंने करीब 26 महीने पहले यूपी की पहली निजी एयरलाइन के तौर पर शंख एयरलाइंस को इंट्रोड्यूस किया और लगातार नियामकीय प्रक्रियाओं को पूरा किया. 

सरकारी मंजूरी और बड़ा मोड़

गुरुवार, 24 दिसंबर को शंख एयरलाइंस को नागरिक उड्डयन मंत्रालय से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट मिला. शंख एयरलाइंस के साथ-साथ अल हिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस को भी एनओसी जारी की गई. यह मंजूरी किसी भी नई एयरलाइन के लिए सबसे अहम कदम होती है, क्योंकि इसके बाद ऑपरेशनल तैयारी और उड़ानों की दिशा में रास्ता साफ हो जाता है. श्रवण कुमार के लिए यह पल सालों की मेहनत और धैर्य का परिणाम था. 

टिकट कीमतों को लेकर अलग मॉडल

शंख एयरलाइंस का सबसे बड़ा दावा है नो डायनामिक प्राइसिंग. श्रवण कुमार साफ कहते हैं कि सुबह 5000 रुपये की टिकट शाम को 25,000 रुपये नहीं होगी. त्योहार हों, कुंभ मेला हो या अचानक डिमांड बढ़ जाए, किराया आसमान नहीं छुएगा. उनका फोकस मध्यम वर्ग पर है, जो समय बचाना चाहता है लेकिन अनिश्चित और महंगे किराए से डरता है. तय रेट, सीमित मुनाफा और भरोसेमंद सेवा यही शंख एयरलाइंस का बिजनेस मॉडल है.

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