Russia-Ukraine War: रूस यूक्रेन युद्ध को अब 4 साल हो चुके हैं. एक ऑपरेशन जिसे मॉस्को ने शुरू में स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन बताया था, उम्मीद की जा रही थी कि सिर्फ कुछ हफ्तों तक ही चलेगा. लेकिन लगभग 1460 दिनों के बाद भी यह युद्ध जारी है. जैसे-जैसे  यह युद्ध लंबा खिंच रहा है मरने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. हालांकि सही संख्या को वेरीफाई करना काफी मुश्किल है लेकिन कुछ इंडिपेंडेंट रिसर्च ग्रुप और इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऐसे अंदाजे देते हैं जो एक बड़ी तस्वीर दिखाने में मदद करते हैं.

कुल  मिलिट्री कैजुअल्टी 

इंडिपेंडेंट रिसर्च इंस्टीट्यूशन और वेस्टर्न डिफेंस एनालिस्ट से इकट्ठा किए गए असेसमेंट के मुताबिक कुल मिलिट्री कैजुअल्टी यानी कि मारे गए, घायल हुए या लापता हुए लोगों की कुल संख्या लगभग 2 मिलियन होने का अंदाजा है.  हालांकि यह संख्या काफी ज्यादा है लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि यह 4 साल तक कई मोर्चों पर चली जबरदस्त लड़ाई में हुए कुल नुकसान को दिखाता है.

रूसी मिलिट्री को नुकसान 

वाशिंगटन में मौजूद सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक हमला शुरू होने के बाद से रूस को कुल लगभग 1.2 मिलियन सैनिकों का नुकसान हुआ है. इस आंकड़े में मरने वालों की संख्या 2,30,000 से 4,30,000 के बीच होने का अनुमान है. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज और ब्रिटिश साप्ताहिक जर्नल द इकोनॉमिस्ट का अनुमान है कि इस संघर्ष में करीब 18 लाख लोग हताहत हुए हैं. यूक्रेन मिलिट्री अधिकारियों का ऐसा दावा है कि रूस को काफी ज्यादा नुकसान हुआ है. 

यूक्रेनी मिलिट्री का नुकसान

यूक्रेन को भी काफी नुकसान हुआ है. इंडिपेंडेंट वेस्टर्न अनुमान बताते हैं कि यूक्रेन आर्म्ड फोर्सज को कुल 5 लाख से 6 लाख के बीच कैजुअल्टी का सामना करना पड़ा है. इसमें घायल और लापता लोग शामिल हैं. मौत के बारे में  कुछ रिपोर्ट्स का ऐसा अनुमान है कि 1 लाख से 2 लाख के बीच यूक्रेनी सैनिक मारे गए होंगे. हालांकि यूक्रेनी प्रेसिडेंट हो वोलोडिमिर जेलेंस्की ने पब्लिकली लगभग 55,000 सैनिकों की ऑफिशियल डेथ टोल की पुष्टि की है. 

सिविलियन कैजुअल्टी 

इंसानी तौर पर हुई मौतों का आंकड़ा काफी ज्यादा रहा है. यूनाइटेड नेशंस के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन में कम से कम 15,172 सिविलियन मारे गए हैं. इनमें 760 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं. यूनाइटेड नेशंस इस बात पर जोर देता है कि असली आंकड़ा शायद काफी ज्यादा हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि कब्जे वाले या फिर काफी ज्यादा विवादित इलाकों में हुई कई मौतें अभी भी वेरीफाई नहीं हुई हैं. 

डेमोग्राफिक स्टडीज से ऐसा पता चलता है की लड़ाई का रूस की मिलिट्री एज की पुरुष आबादी पर काफी गहरा असर पड़ा है. कुछ  अंदाजे बताते हैं कि 18-49 साल के हर 25 रूसी पुरुषों में से एक लड़ाई के दौरान मारा गया या फिर गंभीर रूप से घायल हो गया.

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