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भारत में सड़क हादसों की डरावनी तस्वीर, हर घंटे 20 मौतें; जानें कौन सा राज्य एक्सीडेंट्स में नंबर 1

सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार भारत में सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है जिसके तहत एक साल में लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई है. सबसे ज्यादा नुकसान बाइक सवारों और पैदल वालों का हुआ है.

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  • दोपहिया वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की मौतें सर्वाधिक.

भारत में हर दिन विकास की नई इमारतें खड़ी हो रही हैं और सड़कों का जाल तेजी से फैल रहा है. लेकिन आधुनिक होते इस दौर में देश के हाईवे और शहर लोगों के लिए काल साबित हो रहे हैं. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से जारी की गई ताजा वार्षिक रिपोर्ट ने सबको झकझोर कर रख दिया है. साल 2024 साल देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या ने एक नया और बेहद खौफनाक रिकॉर्ड बनाया है. देश में बढ़ती गाड़ियों की संख्या और रफ्तार की चाहत ने हमारी सड़कों को बेहद असुरक्षित बना दिया है. सरकारी आंकड़ों के जरिए सामने आई यह हकीकत चेतावनी है कि अब सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही भारी पड़ रही है.

एक साल में लाखों लोगों ने गंवाई अपनी जान

मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल देश भर में कुल 4,87,707 सड़क हादसे पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज किए गए. इन भयानक दुर्घटनाओं में 1,77,175 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है. इसके अलावा 4,71,441 लोग इन हादसों में गंभीर रूप से घायल हुए हैं. अगर इन आंकड़ों की तुलना साल 2023 से की जाए तो दुर्घटनाओं के मामलों में 1.48 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है. हर साल सड़क पर दम तोड़ने वाले इन लाखों लोगों का आंकड़ा यह बताने के लिए काफी है कि देश में ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और तेज रफ्तार का कहर किस कदर हावी हो चुका है.

हर घंटे बीस मौतें खोल रही हैं सुरक्षा की पोल

अगर हम पूरे साल के इन डरावने आंकड़ों को समय के हिसाब से छोटे हिस्सों में बांट कर देखें तो असलियत और भी ज्यादा खौफनाक नजर आती है. देश में हर एक घंटे के भीतर औसतन 56 सड़क हादसे हो रहे हैं. इसका सीधा और डरावना मतलब यह निकलता है कि भारत की सड़कों पर हर घंटे 20 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं. समय के साथ बदलती लाइफस्टाइल और सड़कों पर बढ़ती वाहनों की भीड़ के बीच मौत का यह तांडव बिना रुके लगातार जारी है. यह स्थिति दर्शाती है कि सफर पर निकला कोई भी व्यक्ति आज के समय में पूरी तरह सुरक्षित नहीं है.

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किस राज्य में सबसे ज्यादा एक्सीडेंट का रिकॉर्ड?

इस सरकारी रिपोर्ट में अलग-अलग राज्यों की स्थिति को भी पूरी तरह से साफ किया गया है. अगर सबसे ज्यादा एक्सीडेंट होने वाले राज्यों की बात करें तो इस लिस्ट में तमिलनाडु सबसे ऊपर बना हुआ है. तमिलनाडु में एक साल के भीतर सबसे अधिक 67,526 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं जो पूरे देश में सबसे ज्यादा हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि यहां हादसों की संख्या अधिक होने के बावजूद मरने वालों का आंकड़ा अन्य राज्यों से कम रहा. तमिलनाडु सरकार की बेहतर मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं के कारण कई घायलों की जान समय पर बचा ली जाती है.

किस राज्य में मौतों का सबसे बड़ा तांडव

हादसों की संख्या में भले ही तमिलनाडु आगे हो लेकिन दुर्घटनाओं में लोगों की मौत के मामले में उत्तर प्रदेश ने सबको पीछे छोड़ दिया है. उत्तर प्रदेश की सड़कों पर पिछले साल सबसे ज्यादा 24,118 लोगों की मौत सड़क हादसों की वजह से हुई. यूपी में होने वाले हादसों की प्रकृति इतनी गंभीर और जानलेवा होती है कि मौके पर ही या अस्पताल पहुंचने से पहले ही लोग दम तोड़ देते हैं. एक्सप्रेसवे और हाईवे के मामले में तेजी से बढ़ रहे इस राज्य में ओवरस्पीडिंग और भारी वाहनों की टक्कर मौतों की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई है.

नेशनल हाईवे और अन्य सड़कों पर हादसों का गणित

रिपोर्ट में सड़कों के प्रकार के हिसाब से भी हादसों का पूरा ब्योरा दिया गया है. देश के एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर कुल 1,50,958 हादसे हुए जो कुल दुर्घटनाओं का 31.0 प्रतिशत है. इसके अलावा स्टेट हाईवे पर 1,03,538 हादसे दर्ज किए गए जबकि सबसे ज्यादा 2,33,211 दुर्घटनाएं अन्य स्थानीय और शहरी सड़कों पर हुईं. नेशनल हाईवे पर हादसों का प्रतिशत भले ही कम हो लेकिन वहां गाड़ियों की रफ्तार इतनी तेज होती है कि हादसे सीधे मौत में बदल जाते हैं. यही कारण है कि यहाँ सुरक्षा के कड़े इंतजाम बेहद जरूरी हो गए हैं.

हाईवे पर रफ्तार बनी सबसे बड़ी काल

सड़क हादसों में होने वाली मौतों के प्रतिशत को देखें तो नेशनल हाईवे पर सबसे ज्यादा 64,772 लोगों की मौत हुई जो कुल मौतों का 36.6 प्रतिशत है. स्टेट हाईवे पर होने वाली मौतों की संख्या 39,277 रही जो कुल हिस्सेदारी का 22.2 प्रतिशत बैठती है. इसके अलावा अन्य स्थानीय सड़कों पर कुल 73,126 मौतें दर्ज की गईं जो सबसे ज्यादा यानी 41.3 प्रतिशत हैं. कुल मिलाकर हुई 1,64,378 जानलेवा दुर्घटनाओं में से 35.9 प्रतिशत नेशनल हाईवे पर हुईं जिससे साफ है कि चौड़ी सड़कें और तेज रफ्तार ही लोगों की जान की सबसे बड़ी दुश्मन बन रही हैं.

दोपहिया वाहन चालक बने सबसे आसान शिकार

इस रिपोर्ट में यह बात भी पूरी तरह खुलकर सामने आई है कि सड़कों पर चलने वाले बाइक और स्कूटी सवारों की जिंदगी सबसे ज्यादा खतरे में रहती है. कुल सड़क हादसों में जान गंवाने वाले लोगों में सबसे बड़ा हिस्सा यानी 46.2 प्रतिशत बाइक और स्कूटी चलाने वालों का ही था. दुर्घटनाओं का शिकार होने वाले वाहनों में भी दोपहिया गाड़ियों की तादाद सबसे ज्यादा पाई गई. हेलमेट न पहनना, अचानक लेन बदलना और तेज रफ्तार के कारण दोपहिया वाहन चालक बहुत आसानी से भारी वाहनों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा बैठते हैं.

पैदल चलने वाले राहगीर भी नहीं हैं सुरक्षित

दोपहिया वाहनों के बाद सड़क पर पैदल चलने वाले लोग या फुटपाथ का इस्तेमाल करने वाले राहगीर इस जानलेवा लिस्ट में दूसरे नंबर पर आते हैं. कुल मौतों में पैदल चलने वाले लोगों की हिस्सेदारी 20.6 प्रतिशत दर्ज की गई है जो बेहद चिंताजनक है. शहरों में फुटपाथों पर अवैध कब्जे और जेब्रा क्रॉसिंग नियमों का पालन न होने से राहगीर सीधे गाड़ियों के सामने आ जाते हैं. इसके बाद कार, टैक्सी, वैन और हल्के मोटर वाहनों की चपेट में आने से मरने वालों का हिस्सा 12.4 प्रतिशत रहा जो इस बात का सबूत है कि लापरवाही हर स्तर पर भारी पड़ रही है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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