Republic Day 2026: कुछ ही दिनों में देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. इसके लिए पूरे देश में जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं. हर तरफ देशभक्ति के तराने गूंज रहे हैं, लेकिन गणतंत्र दिवस यानी हमारे संविधान दिवस से जुड़ी एक बात काफी लोग नहीं जानते हैं. दरअसल, हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था, लेकिन यह इससे दो महीने पहले ही बनकर तैयार हो गया था. अब आपके मन में भी यह सवाल होगा कि इसे लागू करने के लिए दो महीने इंतजार क्यों किया गया तो आइए आपको इसका जवाब बताते हैं.
26 नवंबर 1949 को अपनाया गया था संविधान
भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था, लेकिन 26 जनवरी 1950 को संविधान अपनाने के बाद यह लोकतांत्रिक और गणतंत्र राज्य बन गया. हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो गया था, लेकिन उसे लागू होने में पूरे दो महीने लगे. बता दें कि भारतीय संविधान को बनने में 2 साल , 11 महीने और 18 दिन लगे थे. भारत के संविधान निर्माता कहे जाने वाले डॉ. भीम राव आंबेडकर ने इसे तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी.
गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है?
अब हम आपको बताते हैं कि हम हर साल गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं? दरअसल, 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी. इसी ऐतिहासिक महत्व को सम्मान देने के लिए संविधान तैयार हुआ, जिसे डॉ. भीम राव आंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने आकार दिया. भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया. ऐसे में इस दिन भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ भारतीय गणराज्य के ऐतिहासिक जन्म की घोषणा हुई थी. यही वजह है कि हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है.
दो महीने बाद क्यों लागू हुआ था संविधान?
भारतीय संविधान बनने के बाद इसे लागू करने में दो महीने का वक्त लगा था, क्या आपको इसकी वजह पता है? अगर नहीं तो जान लीजिए. दरअसल, साल 1930 में 26 जनवरी को लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी. ऐसे में 26 नवंबर 1949 को संविधान बनने के बावजूद 26 जनवरी का इंतजार किया गया, क्योंकि उस वक्त इसे लाहौर अधिवेशन की घोषणा से जोड़ने की योजना थी. यही वजह है कि 29 नवंबर 1949 को संविधान बनने के बाद भी इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया.
क्या है गणतंत्र दिवस का महत्व?
हर साल गणतंत्र दिवस के दिन को देश भर लोकतंत्र के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. इस दिन दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य परेड, झांकियां, तीनों सेनाओं का शक्ति प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं और 21 तोपों की सलामी दी जाती है. यह महज सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं होता, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास का प्रतीक है.
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