Polymer Plastic: रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक देश में पॉलीमर आधारित नोट लाने की संभावना पर विचार कर रहा है. ऐसा इसलिए ताकि उनकी मजबूती और सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सके. इससे पॉलीमर प्लास्टिक के बारे में लोगों के मन में जिज्ञासा जाग उठी है. लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या पॉलीमर प्लास्टिक जल सकती है और इसका इस्तेमाल आमतौर पर कहां होता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
क्या पॉलीमर प्लास्टिक में आग लग सकती है?
जब पॉलीमर प्लास्टिक को काफी ज्यादा तापमान पर रखा जाता है, तो उसमें आग लग सकती है. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, प्लास्टिक का मॉलेक्युलर स्ट्रक्चर टूटने लगता है. इससे वह नरम पड़ जाता है, पिघलने लगता है और आखिर में उसमें आग लग जाती है. उसके जलने की रफ्तार और तरीका प्लास्टिक की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग होते हैं.
थर्मोप्लास्टिक जैसे कि पॉलीइथाइलीन और पॉलीविनाइल क्लोराइड, गर्मी मिलने पर जल्दी पिघल जाते हैं. जलते समय इन पदार्थों से बूंदें टपक सकती हैं और एक बार जब यह अपने ज्वलन बिंदु तक पहुंच जाते हैं तो अक्सर इनमें तेजी से आग लग जाती है. इसके उलट थर्मोसेटिंग प्लास्टिक जैसे कि बैकलाइट और मेलामाइन गर्मी के प्रति ज्यादा प्रतिरोधी होते हैं. यह आसानी से पिघलते नहीं हैं लेकिन काफी ज्यादा तापमान के संपर्क में आने पर यह झुलस सकते हैं.
पैकेजिंग उद्योग का सबसे आम पदार्थ
पॉलीमर प्लास्टिक के सबसे ज्यादा इस्तेमाल में से एक है पैकेजिंग. पॉलीइथाइलीन का इस्तेमाल कैरी बैग, किराने के थैले, दूध की थैलियां, पानी की बोतल और खाना लपेटने वाली फिल्में बनाने में किया जाता है.
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पॉलीमर प्लास्टिक से बने घरेलू उत्पाद
पॉलीप्रोपाइलीन का इस्तेमाल आमतौर पर रोजमर्रा के घरेलू सामानों में किया जाता है. रसोई के डिब्बे, लंच बॉक्स, बाल्टियां, मग, स्टॉल और प्लास्टिक की कुर्सियां आमतौर पर इसी पदार्थ से बनाई जाती हैं. इसकी मजबूती, टिकाऊपन और नमी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता की वजह से इसे काफी महत्व दिया जाता है.
इलेक्ट्रॉनिक और किचन के समान में इस्तेमाल
बेकलाइट और मेलामाइन जैसी प्लास्टिक का इस्तेमाल बिजली और घर के समान में बड़े पैमाने पर होता है. बिजली के स्विच, प्लग, सॉकेट और खाना पकाने के बर्तनों के हैंडल अक्सर बैकलाइट से बने होते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि यह गर्मी को झेल लेता है और बिजली का संचालन नहीं करता.
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