RBI के पास 880.52 मीट्रिक टन सोना, जिसमें सिर्फ 77% ही भारत की तिजोरियों में, बाकी कहां रखा?
हाल ही में खबर आई कि आरबीआई ने अपने सोने के भंडार का एक हिस्सा बेच दिया. RBI के 880.52 मीट्रिक टन सोने का 77% हिस्सा भारत की तिजोरियों में सुरक्षित है. बाकी सोना विदेशों में सुरक्षित तरीके से जमा है.

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और केंद्रीय बैंक की रणनीतियों को लेकर इन दिनों अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कई तरह की चर्चाएं गर्म हैं. हाल ही में ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट ने दावा किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने सोने के भंडार का एक बड़ा हिस्सा बेच दिया है. हालांकि, पीआईबी की फैक्ट चेक विंग ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है. इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि भारत का अथाह सोना आखिर देश-दुनिया में कहां और किस तरह सुरक्षित रखा गया है.
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में यह कहकर खलबली मचा दी कि मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) के तनाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों को बचाने के लिए सोना बेचा है. रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने 22 मई को समाप्त हुए दो हफ्तों के भीतर लगभग 12 अरब डॉलर यानी करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये मूल्य का सोना बाजार में बेच दिया. इसी समय के दौरान RBI ने 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां खरीदीं ताकि अपने वित्तीय पोर्टफोलियो को संतुलित रख सके.
पीआईबी फैक्ट चेक ने दावों को बताया पूरी तरह झूठा
इस दावे की जमीनी हकीकत जानने के लिए प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम ने एक विस्तृत पड़ताल की. जांच में यह बात पूरी तरह साफ हो गई है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 12 अरब डॉलर का सोना बेचे जाने की बात में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है और यह दावा पूरी तरह मनगढ़ंत है. पीआईबी ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक के आधिकारिक और प्रामाणिक वित्तीय आंकड़े इस तरह के किसी भी लेन-देन या बिक्री की पुष्टि बिल्कुल नहीं करते हैं. ऐसे में यह खबर पूरी तरह से निराधार, भ्रामक और गलत है, जिस पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए.
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आरबीआई के कुल स्वर्ण भंडार का सटीक गणित
भंडारण के आंकड़ों पर नजर डालें तो मार्च के अंत तक भारतीय रिजर्व बैंक के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोने का एक विशाल और सुरक्षित भंडार मौजूद था. दिलचस्प बात यह है कि इस कुल सोने का लगभग 77% हिस्सा इस समय भारत की अपनी घरेलू तिजोरियों में रखा गया है. आज से ठीक छह महीने पहले तक स्थिति थोड़ी अलग थी और केवल 66% सोना ही देश के भीतर मौजूद था, लेकिन सुरक्षा रणनीतियों को बदलते हुए भारत ने हाल के दिनों में अपने घरेलू स्टॉक को तेजी से बढ़ाया है.
रूस-यूक्रेन युद्ध और विदेशों से सोना वापस लाने की वजह
रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग के बाद पश्चिमी देशों ने रूस की तमाम विदेशी संपत्तियों को फ्रीज (जब्त) कर दिया था. इस घटना के बाद से भारत के आरबीआई सहित दुनिया भर के कई उभरते देशों के केंद्रीय बैंक सतर्क हो गए हैं. भू-राजनीतिक जोखिमों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के डर से केंद्रीय बैंकों ने विदेशों में रखे अपने सोने को वापस अपने वतन लाना शुरू कर दिया है. इसी रणनीति के तहत भारत ने भी विदेशी बैंकों से अपना सोना निकालकर घरेलू तिजोरियों में शिफ्ट किया है.
भारत में मुंबई और नागपुर की हाई सिक्योरिटी तिजोरियां
भारत के कुल 880 मीट्रिक टन से अधिक के स्वर्ण भंडार में से लगभग 575 मीट्रिक टन से ज्यादा सोना देश की सीमा के भीतर ही मौजूद है. इस भारी-भरकम सुरक्षा वाले हिस्से को भारतीय रिजर्व बैंक ने मुंबई और नागपुर में स्थित अपनी बेहद आधुनिक और उच्च सुरक्षा वाली तिजोरियों में पूरी तरह से महफूज रखा हुआ है. इन दोनों शहरों में बने केंद्रीय बैंक के विशेष वॉल्ट्स (तिजोरियां) हर तरह के तकनीकी और भौतिक खतरों से निपटने के लिए चौबीसों घंटे अभेद्य सुरक्षा घेरे में रहते हैं.
भारत का बाकी सोना कहां जमा है?
घरेलू तिजोरियों में 77% सोना रखने के बाद जो शेष हिस्सा बच जाता है, उसे आज भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और तरलता के लिहाज से विदेशों में भंडारित करके रखा गया है. इस विदेशी भंडारण का सबसे बड़ा और मुख्य हिस्सा ब्रिटेन की राजधानी लंदन में स्थित 'बैंक ऑफ इंग्लैंड' के पास पूरी सुरक्षा के साथ जमा है. ऐतिहासिक रूप से दुनिया के कई बड़े देश अपने सोने की सुरक्षा के लिए इस ब्रिटिश केंद्रीय बैंक पर भरोसा करते आए हैं.
बेसल के बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स की भूमिका
बैंक ऑफ इंग्लैंड के अलावा भारत के सोने का कुछ हिस्सा स्विट्जरलैंड के बेसल शहर में स्थित 'बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स' (BIS) के पास भी सुरक्षित तरीके से जमा किया जाता रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार को आसान बनाने, आपातकाल में तुरंत कैश (तरलता) की व्यवस्था करने और वैश्विक बाजारों में लेनदेन को सुगम बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय बैंकों में सोने का कुछ हिस्सा रखना अनिवार्य और रणनीतिक रूप से बेहद फायदेमंद माना जाता है.
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