ED Office Raid:  हाल ही में रांची में झारखंड पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय के स्थानीय ऑफिस पर छापा मारा. इसके बाद तुरंत ही संवैधानिक और कानूनी बहस शुरू हो गई. ऐसा इसलिए क्योंकि आमतौर पर केंद्रीय जांच एजेंसियां राज्य पुलिस के दखल के बिना स्वतंत्र रूप से काम करती हैं. ईडी तुरंत झारखंड हाई कोर्ट पहुंची. झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या राज्य पुलिस ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसी पर कानूनी रूप से छापा मार सकती है या नहीं. 

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रांची में क्या हुआ 

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक झारखंड पुलिस एक ईडी कर्मचारी के द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपी के बाद रांची में ईडी ऑफिस पहुंची थी. पुलिस ने यह दावा किया है कि वह आपराधिक शिकायत पर कार्रवाई कर रहे थे और सबूत इकट्ठा करने के लिए वहां गए थे. इसमें सीसीटीवी फुटेज भी शामिल था. हालांकि ईडी ने इस कार्रवाई को अपने कामकाज में सीधा दखल बताया है.

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क्या राज्य पुलिस के पास ईडी पर कोई कानूनी अधिकार है 

कानूनी तौर पर राज्य पुलिस के पास अपने अधिकार क्षेत्र में संज्ञेय आपराधिक अपराधों की जांच करने की शक्ति होती है. अगर कोई व्यक्ति केंद्र सरकार के अधिकारी के खिलाफ शिकायत करता है तो पुलिस सबूत इकट्ठा करने के लिए घटनास्थल पर जा सकती है. इसका मतलब है की पूरी तरह से तकनीकी रूप से पुलिस किसी भी परिसर में प्रवेश कर सकती है अगर वह किसी आपराधिक मामले से संबंधित है. 

कहां होती है समस्या पैदा 

परेशानी तब होती है जब कोई भी पुलिस कार्रवाई किसी केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में दखल देती है. मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम की धारा 54 (f) के तहत राज्य पुलिस को ईडी की जांच में सहायता करना कानूनी रूप से जरूरी है. कोई भी कार्रवाई जो किसी केंद्रीय एजेंसी को रोकती है या फिर डराती है उसे संविधान के संघीय ढांचे का उल्लंघन माना जा सकता है. 

क्या अदालत ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई रोक सकती है 

सुप्रीम कोर्ट और अलग-अलग हाईकोर्ट ने ऐसा कहा है कि पुलिस जांच कानूनी होती है. लेकिन अगर कोई भी जांच संस्थागत आजादी को खतरा महसूस करा रही है तो अदालतें दखल दे सकती हैं. ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियों से जुड़े मामलों में अदालतें अक्सर पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा देती है ताकि पीएमएलए जैसे केंद्रीय कानून के तहत जांच में कोई रुकावट ना आए.

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