अयोध्या के भव्य राम मंदिर परिसर का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह बदलने जा रहा है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के दैनिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली है. इस पद की जिम्मेदारी भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को दी गई है. इस रेस में उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेयउत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय, बिहार के पूर्व डीजीपी डॉ. परेश सक्सेना और पूर्व आईएएस दिनेश चंद्र का नाम भी शामिल था. आइए जानें कि उनको कितनी सैलरी मिलेगी और काम आखिर क्या होगा.

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वेतन और सेवा से जुड़ी शर्तें

राम मंदिर के नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी के वेतन और आर्थिक पैकेज को लेकर ट्रस्ट ने शुरुआत में ही स्थिति स्पष्ट कर दी थी. जब ट्रस्ट की तरफ से इस पद के लिए आवेदन मांगे गए थे, तब उल्लेख किया गया था कि चयनित अधिकारी की सैलरी और भत्ते आपसी सहमति से तय किए जाएंगे. अधिकारी के लंबे प्रशासनिक अनुभव और योग्यता के आधार पर उनका मासिक वेतन निर्धारित होगा. इसके अलावा, नियुक्त अधिकारी को 3 साल के कॉन्ट्रैक्ट पर रखा जाएगा. इस दौरान उन्हें रहने के लिए आवास, सरकारी वाहन, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य वीआईपी सुविधाएं सीधे राम मंदिर ट्रस्ट फंड से दी जाएंगी.  

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नए सीईओ के मुख्य दायित्व और प्रशासनिक काम  

अयोध्या में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए सीईओ की जिम्मेदारी बेहद अहम होगी. नए कार्यपालक अधिकारी का मुख्य काम मंदिर का दैनिक प्रशासन संभालना, अलग-अलग विभागों के बीच आपसी समन्वय बनाना, कर्मचारियों के कामकाज पर नजर रखना और देश-दुनिया से आ रहे श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाना होगा. इसके साथ ही, ट्रस्ट अपने प्रशासनिक नियमों और डीड में कुछ जरूरी बदलाव भी कर रहा है. नए सीईओ इन व्यवस्थाओं को लागू करके संस्थागत रूप देने का काम करेंगे.

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AI तकनीक और 600 अंकों के पैमाने से कैसे हुआ चयन?

राम मंदिर के पहले सीईओ का चयन बेहद कड़ा और आधुनिक प्रक्रिया के तहत किया गया. इस पद के लिए कुल 5,585 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था. आवेदनों की प्राथमिक छंटनी के लिए AI आधारित स्क्रीनिंग के साथ-साथ मैनुअल मूल्यांकन का सहारा लिया गया. ट्रस्ट ने चयन के लिए 600 अंकों का एक विशेष मूल्यांकन ढांचा तैयार किया था.

पहले दौर की जांच में 3,577 उम्मीदवार शामिल हुए थे, जिनमें से 470 या उससे अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को ही अगले चरण के लिए चुना गया. इसके बाद 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में 108 आवेदकों का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन इंटरव्यू हुआ. अंतिम चरण में पहुंचे 16 शीर्ष उम्मीदवारों के साक्षात्कार के बाद एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का चयन किया गया.

कारगिल युद्ध के नायक जितेंद्र मिश्र का शानदार सैन्य करियर

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना में एक बेहद प्रतिष्ठित पहचान रखते हैं. वे वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ और डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन एंड ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ जैसी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं.

1999 के कारगिल युद्ध (ऑपरेशन सफेद सागर) के दौरान जब वे स्क्वाड्रन लीडर थे, तब वे उस विशेष टीम का हिस्सा रहे जिसने मिराज 2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों को तैनात और संचालित किया था. इन्हीं घातक बमों के जरिए वायु सेना ने टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर दुश्मन के ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर युद्ध का पासा पलटा था. अब यही अनुभवी पूर्व सैन्य अधिकारी राम मंदिर के प्रबंधन और सुरक्षा की कमान संभालेंगे.

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